नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अंतरिम आदेश को विशेष धनशोधन निवारण कानून की विशेष अदालत द्वारा पुष्टि किए जाने के बाद एजेंसी जल्दी ही हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह तथा उनकी पत्नी की आठ करोड रूपए मूल्य की संपत्ति अपने कब्जे में लेने के लिए कदम उठाएगी।
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धनशोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत एजेंसी ने इसी साल मार्च में कुछ एलआईसी पॉलिसियां, बैंक में जमा राशि, एक सावधि जमा और दक्षिण दिल्ली के पॉश जीके इलाके में एक इमारत के दो मंजिलों को कुर्क करने का आदेश दिया था।
पीएमएलए के तहत निर्णायक प्राधिकरण में सदस्य (विधि) तुषार वी शाह ने कहा, मैं इसलिए, पीएमएलए की धारा पांच के उपखंड (1) के तहत संपत्ति कुर्क करने की पुष्टि करता हूं। उन्होंने कहा, मैं, इसलिए, आदेश देता हूं कि यह जब्ती पीएमएलए के तहत अपराध से संबंधित कार्यवाही के अदालत में लंबित रहने के दौरान जारी रहेगी और विशेष अदालत द्वारा पीएमएल के तहत पारित कुर्की के आदेश के बाद निर्णायक हो जायेगी।
इस आदेश की प्रति पीटीआई के पास है। आदेश में मुख्यमंत्री तथा उनकी पत्नी के खिलाफ ईडी द्वारा दाखिल शिकायत तथा एलआईसी एजेंट आनंद चौहान सहित मामले में विभिन्न आरोपियों के बयानों पर गौर किया गया है।
ईडी ने 23 मार्च को 7.93 करोड़ रूपए की संपत्ति कुर्क करने का अंतरिम आदेश जारी किया था जिसमें उसने प्रतिभा सिंह के नाम पर दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 में एक इमारत के भूतल और पूरे बेसमेंट तथा उनके नाम पर कई एलआईसी पॉलिसी , बैंक बैलेंस और एक सावधि जमाराशि तथा उनके पति के नाम पर जमा राशि को कुर्क कर दिया था।
एजेंसी ने हाल ही में मामले में उनकी पत्नी प्रतिभा और पुत्र विक्रमादित्य से पूछताछ की थी। मुख्यमंत्री ने अपने या अपने परिवार द्वारा कोई गडबड़ी किए जाने से इंकार किया है। पीएमएलए के तहत कुर्क संबंधी किसी आदेश का मकसद आरोपी को गलत तरीके से अर्जित संपत्ति के लाभ से वंचित रखना होता है तथा ईडी द्वारा जारी किए गए ऐसी किसी आदेश के खिलाफ इस कानून के निर्णायक प्राधिकार के समक्ष 180 दिनों के अंदर अपील की जा सकती है।
अगर निर्णायक प्राधिकार भी आदेश की पुष्टि करता है तो आरोपी इस कानून के अपीलीय न्यायाधिकरण में 45 दिनों के अंदर इसके खिलाफ अपील कर सकता है।
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