ब्याज़ में गई पेंशन
उन्होंने बताया, "मैंने साहूकार से 25 हज़ार रुपए क़र्ज लिया था जिसका हर महीना 1250 रुपए ब्याज़ चुका रहा हूँ। तीन सौ रुपए महीना की पेंशन भी ब्याज़ में ही जा रही है।"
पिछले तीन दशकों से इसी तरह हल जोत रहे देवराज का हौसला बरक़रार है। उन्होंने कहा कि जब तक जीवित हूँ ऐसे ही मेहनत करता रहूंगा।
लेकिन सूखे के कारण सर पर चढ़े क़र्ज़ ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया है। देवराज का कहना है कि यदि सरकार क़र्ज़ का कुछ कर दे तो ज़िंदग़ी आसान हो जाए।
सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने देवराज की मदद की पेशकश की है। आशीष सागर ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इसका संज्ञान लेंगे और मदद के लिए आगे आएंगे।
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