नई दिल्ली: सम-विषम फार्मूले के चौथे दिन बड़ी संख्या में कार चालक ट्रैफिक पुलिस कर्मियों से बहस करते नज़र आए। नियम का उल्लंघन करने वालों के चालान काटे गए गए, हालांकि शंकाओं के उलट सोमवार के दिन दिल्ली की सम-विषम कार योजना किसी बड़ी समस्या का शिकार नहीं हुई। मगर इस नियम को सफल तभी कहा जाएगा, जब दिल्ली के प्रदूषण के स्तर को कम करने में यह सफल रहेगी।
माना जा रहा था कि दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के मकसद से शुरू की गई इस योजना की पहली परीक्षा सोमवार को होगी क्योंकि नववर्ष शुरू होने के बाद सोमवार पहला कार्यदिवस था। लेकिन, दिल्ली इस परीक्षा में कुल मिलाकर पास रही। दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने कहा, "हमें खुशी है कि लोग नियमों का पालन कर रहे हैं।" राय दिल्ली सचिवालय पर बस में सवार हुए और दिल्ली गेट, कनाट प्लेस, पटेल चौक और आईटीओ होते हुए वापस दिल्ली सचिवालय पहुंचे।
राय ने कहा, "अनुमान और संदेह जताए जा रहे थे कि सोमवार को जब दफ्तर खुलेंगे, तब क्या होगा। कुछ लोगों को डर था कि आज (सोमवार को) सार्वजनिक परिवहन में भीड़ ही भीड़ दिखेगी या चालक नियम तोड़ते दिखेंगे। लेकिन, हमें ऐसा कुछ नहीं दिखा।"
परिवहन मंत्री ने पटेल चौक मेट्रो स्टेशन पर कुछ मुसाफिरों से बात की और उनसे पूछा कि किसी तरह की दिक्कत तो नहीं आ रही है। राय ने कहा, "लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मैं कह सकता हूं कि लोगों को अभी तक कोई दिक्कत नहीं पेश आई है।"
15 दिवसीय सम-विषम नंबर फार्मूले पर दिल्ली में पहली जनवरी से अमल किया जा रहा है। इसके तहत सम और विषम नंबर की कारें एक-एक दिन के अंतराल पर चल रही हैं। मकसद सड़क पर कारों की संख्या कम कर जानलेवा प्रदूषण को घटाना है। योजना पर सुबह 8 से रात 8 बजे तक अमल होता है। रविवार को योजना लागू नहीं होती। कुछ श्रेणियों के लोगों को इससे छूट दी गई है। हालांकि, सोमवार को विषम नंबर की कई गाड़ियां दिखीं लेकिन कुल मिलाकर सुबह के समय सड़क पर गाड़ियां कम दिखीं।
मेट्रो से रोजाना सफर करने वालों ने भी कहा कि कोई बहुत ज्यादा भीड़ मेट्रो में नहीं है। चांदनी चौक से नोएडा सिटी सेंटर तक की लंबी दूरी मेट्रो से तय करने वाले अदनान अली ने कहा, "मेट्रो में रोजाना के मुकाबले कुछ ज्यादा लोग थे लेकिन वैसी भीड़ नहीं थी जिसके होने के बारे में मैं सोच रहा था।" लेकिन, सिर्फ चार डिब्बों वाली मेट्रो की वायलेट लाइन पर कहानी कुछ और दिखी।
नेहरू प्लेस में एक निजी फर्म में काम करने वाली श्वेता आर्या ने कहा, "मंडी हाऊस पर बहुत ज्यादा भीड़ थी। ट्रेन में दाखिल होने के लिए बहुत धक्के खाने पड़े। लोगों ने पीछे से धक्का दिया, मैं करीब-करीब गिर ही पड़ी थी।"
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