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अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश तोड़ने की बात बर्दाश्त नहीं : रविशंकर प्रसाद

रामजस कॉलेज में छात्रों के दो गुटों के बीच हिंसक झड़प के राजनीतिक रूप अख्तियार करने के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता तथा केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को चेतावनी देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में देश को तोड़ने की

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Image Source : RAVISHANKAR PRASAD Ravishankar prasad

नई दिल्ली: रामजस कॉलेज में छात्रों के दो गुटों के बीच हिंसक झड़प के राजनीतिक रूप अख्तियार करने के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता तथा केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को चेतावनी देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में देश को तोड़ने की बातें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। 

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रविशंकर ने पूछा, "हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूरा समर्थन करते हैं, लेकिन इसके नाम पर देश को तोड़ने को लेकर आंदोलन को क्या देश मंजूरी देगा? जो लोग इस वक्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या वे उस वक्त अपनी आवाज उठाते हैं, जब आतंकवादी लोगों को मारते हैं, जब हमारे सुरक्षाबल मारे जाते हैं? क्या उन्होंने इस बारे में कभी बात की है?"

सेना के शहीद अधिकारी की बेटी गुरमेहर कौर की ओर इशारा करते हुए उन्होंने उन लोगों पर सवाल उठाए, जो उनके नाम पर राजनीति में संलिप्त हैं। उन्होंने कहा, "उनके पिता आतंकवादियों के साथ लड़ाई के दौरान मारे गए। जो लोग उनके नाम पर राजनीति कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि वे लोग उस वक्त कहां थे, जब उनके पिता को आतंकवादियों ने मार डाला था।"

दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के परिसर में 22 फरवरी को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर छात्रों, शिक्षकों तथा पत्रकारों पर हमले के बाद कौर ने सोशल मीडिया पर एबीवीपी के खिलाफ अभियान चलाया।

एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने रामजस कॉलेज में उस संगोष्ठी को जबरन रद्द करवा दिया था, जिसमें हिस्सा लेने के लिए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र उमर खालिद को आमंत्रित किया गया था। उमर खालिद का नाम उन छात्रों की फेहरिस्त में शामिल है, जिन पर जेएनयू में एक कार्यक्रम के दौरान देश-विरोधी नारे लगाने का आरोप लग चुका है।

कानून मंत्री ने कहा, "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में देश तोड़ने की बात बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, लेकिन यह देश को तोड़ने के प्रयास को मंजूरी नहीं देता है।"

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