देहरादून: उत्तराखंड से राज्यसभा की सीट के लिए चुनाव से ठीक पहले चुनाव मैदान से हटने वाली भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार गीता ठाकुर ने भाजपा पर दलित विरोधी मानसिकता से प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। ठाकुर ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की थी कि वह भाजपा समर्थित एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार अनिल गोयल के पक्ष में अपना नाम वापस ले रही हैं। ठाकुर ने देर रात पार्टी से इस्तीफे की घोषणा की।
ठाकुर ने भाजपा पर महिला विरोधी और दलित विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने पहले उनका एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर समर्थन किया और उन्हें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता अजय भट्ट सहित पार्टी के नौ विधायकों का समर्थन प्राप्त था। हालांकि उन्हें बाद में मैदान से हटने के लिए बाध्य किया गया। उन्होंने भाजपा पर मानसिक रूप से कष्ट देने का आरोप लगाया और कहा कि पहले उनकी उम्मीदें जगाई गईं और उसके बाद भाजपा की पैसा और ब्रीफकेस राजनीति के चलते निर्दयता से धराशायी कर दी गईं।
ठाकुर ने अपमान के लिए उत्तराखंड भाजपा प्रभारी श्याम जाजू और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन सह सचिव शिवप्रकाश को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी की प्राथमिक सदस्यता के साथ ही सेंट्रल फिल्म सेंसर बोर्ड की सदस्यता और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के ब्रांड अंबेसडर से भी तत्काल प्रभाव से हट रही हैं।
भाजपा को तब एक और झटका लगा जब भीमताल से उसके विधायक दान सिंह भंडारी ने विधानसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा शुक्रवार रात विधानसभाध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजाल को सौंप दिया। उन्होंने कुंजाल से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने का अनुरोध किया। उन्होंने इस्तीफे का कोई कारण नहीं बताया। कुंजाल से भंडारी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। भाजपा के मुख्य व्हिप मदन कशिक ने कहा कि उन्हें कोई जानकारी नहीं कि भंडारी ने इस्तीफा क्यों दिया है।
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