नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर को राज्यसभा में पारित करवाने के लिए केंद्र सरकार बजट सत्र का इंतजार करने पर विचार कर रही है। यह जानकारी एक उच्चस्तरीय सूत्र से बुधवार को मिली। सरकार को अगले साल अप्रैल में राज्यसभा में सत्ता पक्ष के सांसदों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि अगले साल मार्च और अप्रैल में कई कांग्रेस सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
मार्च में राज्यसभा में पांच नामित सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार नए सदस्यों को नामित करेगी। सूत्र ने कहा, "अभी विधेयक पारित कराने के लिए समझौते करने से बेहतर है कि हम इसे अप्रैल 2016 में पारित कराएं।" इस विधेयक को पारित करने के लिए कांग्रेस तीन मांगों पर अड़ी हुई है।
सूत्र ने कहा, "यदि अप्रैल में नहीं, तो इसे मई, जून या जुलाई में पारित कराया जा सकता है। यह कुछ दिनों या महीनों की बात है।" सरकार पहले एक अप्रैल, 2016 से जीएसटी को लागू करना चाहती थी।
राज्य सभा में कांग्रेस के विरोध की वजह से जीएसटी विधेयक पारित नहीं हो पा रहा है। राज्यसभा में सत्ताधारी राजग अल्पमत में है। जीएसटी पर उद्योगों के साथ एक परिचर्चा बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था अंतरराज्यीय बिक्री कारोबार पर प्रस्तावित एक प्रतिशत अतिरिक्त कर का प्रस्ताव गुजरात और तमिलनाडु की सरकारों ने किया था। उनका कहना था कि जीएसटी मुख्यत: गंतव्य आधारित कर है इसलिये उन्हें राजस्व का नुकसान होगा।
जेटली ने कहा, मैंने संसद के अपने दोस्तों से कहा है कि मैं विनिर्माण आधारित राज्यों के पास इस मुद्दे पर बातचीत के लिये जाने को तैयार हूं कि हमने आपको पांच साल तक राजस्व नुकसान की भरपाई की गारंटी दी है। इसलिये एक प्रतिशत अतिरिक्त कर के मामले को सुलझाया जा सकता है।
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