नई दिल्ली: इस्लामी प्रचारक और उपदेशक जाकिर नाईक का एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) इन आरोपों के बीच गृह मंत्रालय की निगरानी में आ गया है कि उसने विदेशों से प्राप्त चंदे का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों और लोगों को कट्टरपंथी विचारों के लिए प्रेरित करने के लिए किया।
बिना लाइसेंस वाले चैनल के प्रसारण पर होगी सख्त कार्रवाई
महाराष्ट्र सरकार ने भी जाकिर नाइक की पीस टीवी के प्रसारण को लेकर जांच के आदेश दे दिये हैं। पीस टीवी का टेलिकास्ट किसने किया, अब इस बात की जांच की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर पीस टीवी चलाने वाले केबल ऑपरेटर्स पर भी कार्रवाई होगी। सूत्रों का दावा है कि दो बार अप्लाई करने के बाद भी पीस टीवी को नहीं मिला था लाइसेंस नहीं मिला था। प्रसारण करने वालों पर कार्रवाई होगी और इंटरनेट पर यूआरएल भी ब्लॉक किया जाएगा।
एनजीओ के धनस्रोत की जांच
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आईआरएफ की गतिविधियों की जांच के आदेश दिये गये हैं। आईआरएफ विदेशी चंदा विनियमन कानून के तहत दर्ज है। मुम्बई के नाईक तब सरकारी निगरानी में आ गए जब यह खबर आई कि उनके भाषण ने ही ढाका कैफे के हमलावरों में से कुछ को प्रेरित किया था। महाराष्ट्र सरकार ने मुस्लिम उपदेशक के भाषणों की जांच का आदेश कल दिया था।
गृह मंत्रालय इन आरोपों की जांच करेगा कि आईआरएफ को मिले विदेशी चंदे का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए किया गया। इस एनजीओ के धन का उपयोग लोगों को इस्लाम के प्रति और युवकों को आतंक की आकर्षित करने के लिए किया गया। ये सारी गतिविधियां एफसीआरए के प्रावधानों के विपरीत है। इस कानून का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय आईआरएएफ के विदेशी चंदे के स्रोत की भी जांच करेगा।
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