1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. ग्रीनपीस इंडिया नहीं ले पाएगी विदेशी चंदा !

ग्रीनपीस इंडिया नहीं ले पाएगी विदेशी चंदा !

नई दिल्ली: भारत सरकार ने गैर सरकारी संगठन 'एनजीओ' ग्रीनपीस के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने ग्रीनपीस के खिलाफ ताजे कार्रवाई में विदेशी अंशदान विनियमन कानून 'एफसीआरए' के तहत पंजीकरण रद्द कर दिया

ग्रीनपीस इंडिया नहीं...- India TV Hindi
ग्रीनपीस इंडिया नहीं ले पाएगी विदेशी चंदा !

नई दिल्ली: भारत सरकार ने गैर सरकारी संगठन 'एनजीओ' ग्रीनपीस के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने ग्रीनपीस के खिलाफ ताजे कार्रवाई में विदेशी अंशदान विनियमन कानून 'एफसीआरए' के तहत पंजीकरण रद्द कर दिया है।

इसकी वजह से अब ग्रीनपीस इंडिया को विदेशों से मिलने वाले चंदे पर लगाम लग जाएगी, जिसके दम पर वो कथित तौर पर देश की आर्थिक प्रगति के खिलाफ कार्य करती रही है। हालांकि ग्रीनपीस ने कहा कि वो बिना विदेशी चंदे के भी अपना काम जारी रखेगी।

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एफसीआरए के तहत दि ग्रीनपीस इंडिया का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है।

इस निर्णय का मतलब यह होगा कि एनजीओ विदेश से धनराशि प्राप्त नहीं कर सकेगा जो उसके समग्र संचालन व्यय का करीब 30 प्रतिशत है। ग्रीनपीस इंडिया में करीब 340 लोग कार्यरत हैं।

गृह मंत्रालय का यह निर्णय ग्रीनपीस इंडिया का एफसीआरए के तहत उसका लाइसेंस 180 दिन के लिए निलंबित करने के उसके कदम के पांच महीने बाद आया है। मंत्रालय ने इसके साथ ही यह आरोप लगाते हुए उसके सात बैंक खातों के संचालन पर रोक लगा दी थी कि समूह देश की आर्थिक प्रगति और जनता के हितों के खिलाफ काम कर रहा है।

सरकार ने आरोप लगाया था कि एनजीओ ने संबंधित अधिकारियों को सूचित किये बिना अपना विदेशी दान प्राप्त करने के लिए पांच खाते खोलकर नियमों का उल्लंघन किया।

सरकार ने एफसीआरए के तहत पंजीकरण स्थगित करते हुए यह भी कहा था कि एनजीओ ने अपने विदेशी अंशदानों के बारे में बार बार कम और गलत राशि का उल्लेख किया।

ग्रीनपीस इंडिया ने सरकार की कार्रवाई को ‘अभियानों को चुप’ कराने का प्रयास करार दिया और कहा कि वह इससे विचलित नहीं होगा। ग्रीनपीस इंडिया के कार्यकारी निदेशक वी गोपाल ने कहा कि ग्रीनपीस इंडिया अपना अभियान बिना विचलित हुए जारी रखेगा और वास्तव में वह नागरिक अधिकारों पर कार्रवाई को रेखांकित करने के लिए एक ‘नया रचनात्मक अभियान’ शुरू कर रहा है।

गोपाल ने कहा, ‘हमारा एफसीआरए पंजीकरण रद्द होना समुदाय के असहमति के अधिकार के खिलाफ कठोर हमला है। यह अधिक स्थायी भविष्य और जनप्रक्रियाओं में पारदर्शिता के लिए अभियानों को चुप करने का एक और प्रयास है।’

Latest India News