GST बिल: राज्यसभा के बाद लोकसभा में भी पास, PM ने कहा- कालेधन पर लगेगी रोक
नई दिल्ली: राज्यसभा में पारित हो चुका वस्तु एवं सेवा कर विधेयक (GST) आज लोकसभा में पेश किया गया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बिल को राज्यसभा में पास कराने के लिए सभी पार्टियों

नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर (GST) को देश में कर आतंकवाद से मुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि इस व्यवस्था में गरीबों के उपयोग की अधिकतर वस्तुओं को कर से अलग रखा गया है और इससे भ्रष्टाचार और काले धन पर लगाम लगाने का मार्ग प्रशस्त होगा। बहुप्रतीक्षित जीएसटी से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा में हुई चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए प्रधानमंत्री ने जीएसटी के लिए सभी राजनीतिक दलों को धन्यवाद दिया।
पीएम ने कहा, जीएसटी को किसी एक पार्टी या सरकार की विजय के रूप में नहीं बल्कि भारत की स्वस्थ लोकतांत्रिक परम्परा एवं सभी राजनीतिक दलों की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। यह सभी पूर्व की सरकारों और वर्तमान सरकार के प्रयासों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी के मामले में कंज्यूमर इज किंग (उपभोक्ता ही सम्राट है)। उन्होंने जीएसटी लागू होने से आम उपभोग की वस्तुओं के महंगे होने की आशंकाओं को परोक्ष रूप से निर्मूल साबित करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं के आम उपयोग की अधिकतर वस्तुओं पर लगने वाले कर को अलग रखा गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी का अर्थ ग्रेट स्टेप बाई इंडिया :भारत की महान पहल: है, जीएसटी का अर्थ ग्रेट स्टेप टूवड्र्स ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता की तरफ महान कदम), ग्रेट स्टेप टूअड्र्स ट्रांसफार्मेशन (बदलाव की दिशा में महान कदम) है। इसलिए हम एक एक नई व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं जो एक भारत, श्रेष्ठ भारत के सपने को साकार करने वाली है।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी की तत्कालीन राज्य सरकार के वित्त मंत्री द्वारा जीएसटी का विरोध करने संबंधी सवाल पर मोदी ने कहा कि जीएसटी को लेकर संशय रहे हैं। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब मेरे मन में भी संशय रहा। इस बारे में मैंने तब प्रणब मुखर्जी से चर्चा की थी। मुख्यमंत्री के रूप मेरे अनुभव प्रधानमंत्री के रूप में जीएसटी को समझने में काम आए। इस कालखंड में काफी कमियों को दूर किया गया और इसमें सभी का योगदान है।
प्रधानमंत्री ने कहा, यह पहल टैक्स टेरर (कर आतंकवाद) से मुक्ति की दिशा में एक अहम पहल है। जो सात से लेकर 13 कर व्यवस्थाओं के स्थान पर लाई गई है। मोदी ने कहा कि आज हम देख रहे हैं कि कई तरह के स्वरूप हैं और इसके स्थान पर एक समान कर व्यवस्था आने से कर की दर और कर की प्रणाली को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उपभोक्ता राजा है (कंज्यूमर इज किंग)। उन्होंने कहा कि इससे छोटे छोट उद्यमियों और उपभोक्ताओं को लाभ होगा। इससे अर्थव्यवस्था के विकास के विभिन्न पहलुओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से और तेज गति से चलाने के लिए पांच बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है जिसमें व्यक्ति, मशीन, सामग्री, धन और समय शामिल है। और इनका सर्वोच्च उपयोग किये जाने की जरूरत है। जीएसटी के माध्यम से हम उस दिशा में बढेंगे। उन्होंने कहा कि यह एक सरलीकृत व्यवस्था को आगे बढ़ाने वाली है। विदेशों से आने वाले पेट्रोलियम में भी लाभ होगा। हर राज्य एक दूसरे पर निर्भर है, लेनदेन पर निर्भर हैं। इस व्यवस्था से राज्यों के बीच कठिनाइयों को दूर करने में मदद मिलेगी।
मोदी ने कहा कि जीएसटी से सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि समानता के आधार पर आगे बढ़ने और संतुलित विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि इससे विनिर्माण राज्यों को कुछ परेशानी पेश आ सकती है और भारत सरकार ने विनिर्माण राज्यों को राहत प्रदान करने की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता आयेगी और केंद्र एवं राज्यों के बीच विश्वास बढेगा। यह व्यवस्था संघीय ढांचे को मजबूत बनायेगी।
उन्होंने कहा कि जीएसटी विधेयक के तहत गरीबों के लिए जितनी उपयोग की चीजें हैं, उन्हें कर के दायरे से बाहर रखा गया है। जरूरी दवाओं को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था भ्रष्टाचार और कालेधन पर रोक लगाने में कारगर होगी। इससे कर एकत्र करने की लागत में कमी आयेगी और सरकारी हस्तक्षेप को कम करने में मदद मिलगी। इससे भ्रष्टाचार शून्य की ओर बढे़गा।