अहमदाबाद: गुजरात में शिक्षा और नौकरियों में पटेल समुदाय को आरक्षण देने की मांग को लेकर बुधवार को राज्यव्यापी बंद के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। बंद का आह्वान पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति ने किया था। इस दौरान भड़की हिंसा में 8 लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
दंगा, आगजनी, पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान के बाद कई शहरों में सेना तैनात करने का फैसला किया गया। गुजरात राज्य पुलिस कंट्रोल पर तैनात एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "अर्धसैनिक बलों की फायरिंग में अहमदाबाद में तीन और बनासकांठा में दो लोग मारे गए। दंगाइयों पर काबू पाने के लिए अर्धसैनिक बलों को गोली चलानी पड़ी।"
गुटों के बीच हुए संघर्ष और पथराव में 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। सैकड़ों वाहन फूंक दिए गए हैं। सौ तो बसें ही फूंकी गई हैं।
सेना, सीआरपीएफ, राज्य आरपीएफ, आरएएफ और बीएसएफ की 133 कंपनियों को अहमदाबाद, सूरत, राजकोट, जामनगर, मोरबी,
वडोदरा, मेहसाणा और बनासकांठा में तैनात किया गया है। राज्य पुलिस की पूरी ताकत भी इनके साथ हालात पर काबू पाने में लगी हुई है।
सेना और अर्ध सैनिक बलों ने अलग-अलग शहरों के दंगा प्रभावित इलाकों में फ्लैग मार्च किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्य की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और कई अन्य दलों के वरिष्ठ नेताओं ने लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। लेकिन, इनकी अपील का असर होता नहीं दिख रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मंगलवार से जिस तरह का वातावरण महात्मा गांधी और सरदार पटेल की भूमि पर बन रहा है और जिस तरह से हिंसा हो रही है.. हम जानते हैं कि हिसा का कोई उद्देश्य नहीं है और एक साथ चलकर तथा साथ रहकर ही राज्य का विकास संभव है।"
उन्होंने कहा, "गुजरात के सभी भाई और बहनों से यह मेरा विनम्र अुनरोध है कि वे शांति बनाए रखें क्योंकि हर मुद्दा बातचीत से ही सुलझ सकता है। हमें लोकतंत्र की भावना का पालन करना चाहिए और सभी मुद्दे सुलझाने चाहिए तथा गुजरात को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहिए।"
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