नई दिल्ली: चुनावी दंगल में ताल ठोककर जीत हासिल करने वाले उन उम्मीदवारों को झटका लग सकता है जो कम पढ़े लिखे होने के बावजूद भी पंचायत चुनाव में शामिल होते रहे हैं। आपको बता दें कि हरियाणा में पंचायत चुनाव में खड़े होने के लिए शैक्षणिक योग्यता की एक न्यूनतम कसौटी रख दी गई है। लेकिन हरियाणा के चुनावी उम्मीदवारों के लिए बड़ी मुश्किल यह है कि अधिकांश प्रतिभागी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को ही पूरा नहीं करते, ऐसे में इन उम्मीदवारों का प्रधान बनने का सपना काफूर हो सकता है।
क्या है मापदंड-
पंचायत चुनाव लड़ने के लिए- न्यूनतम 10वीं पास
आरक्षित सीटों पर लड़ने के लिए- न्यूनतम आठवीं पास
क्या है मुश्किल-
साल 2011 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में 20 साल से अधिक की सिर्फ 16 फीसदी आबादी ही 10वीं पास की शैक्षणिक योग्यता पूरा करती है। आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा के ग्रामीण इलाकों की 69.9 फीसदी आबादी मुश्किल से 8वीं या उससे कम कक्षा तक पढ़ी-लिखी है। यानी आरक्षित सीटों पर लड़ना भी अब कईयों के लिए मुश्किल हो सकता है। सीधे सीधे शब्दों मे कहें तो राज्य की 84 फीसदी आबादी सामान्य सीटों पर चुनाव लड़ने के योग्य नहीं है।
| उम्र (महिलाएं) |
शिक्षा |
| 20 साल से अधिक |
71.1 फीसदी महिलाएं प्राइमरी तक |
| 19 फीसदी महिलाएं |
8वीं या उससे आगे तक की पढ़ाई |
| 74.9 फीसदी आबादी |
सिर्फ प्राइमरी तक |
| 14.2 फीसदी लोग |
सिर्फ मिडिल |
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