नई दिल्ली: सरकारी गवाह बन चुके पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली के मुंबई 26/11 हमले में किए गए खुलासों पर सुरक्षा एवं विधि विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि पूरी दुनिया इन खुलासों को गंभीरता से लेगी और 'भारत में आतंकवादी हमलों के पीछे पाकिस्तान की भूमिका को अंतत: साबित कर देगी।' विशेषज्ञों का हालांकि यह भी कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा के पूर्व सदस्य हेडली द्वारा अमेरिका से वीडियोकॉन्फ्रेंसिंग द्वारा भारतीय अदालत को दिए गए बयान का पकिस्तान पर शायद ही कोई असर पड़े। भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद मलिक ने पंचकुला से फोन पर आईएएनएस से कहा, "मेरा खयाल है कि हेडली द्वारा किए गए इन खुलासों का पूरी दुनिया में व्यापक पैमाने पर असर पड़ेगा। पूरी दुनिया के सामने सच्चाई आ जाएगी तो हमें अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अधिक समर्थन मिलेगा।" उन्होंने कहा, "हमें पता है कि अपनी लड़ाई हमें खुद लड़नी होगी, लेकिन हमें अंतर्राष्ट्रीय समर्थन की भी जरूरत पड़ेगी और इसका फर्क पड़ता है।"
हेडली ने हाल ही में विशेष टाडा अदालत के न्यायाधीश जी. ए. सनाप को दिए बयान में कहा है कि मुंबई में 2008 में हुए हमलों में शामिल आतंकवादियों को पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी (इंटर सर्विस इंटेलिजेंस- आईएसआई) द्वारा प्रशिक्षित किया गया था। आतंकवादियों ने इसके अलावा मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर और नौसेना के हवाईअड्डे और नई दिल्ली स्थित नेशनल डिफेंस कॉलेज पर भी हमलों की योजना बनाई थी। इस बीच जनरल मलिक ने कहा कि हेडली के खुलासों के बावजूद पाकिस्तान इनकार करता रहेगा। उन्होंने कहा, "अब सवाल यदि यह है कि क्या पाकिस्तान इन खुलासों के आधार पर मुंबई हमलों के दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा तो ऐसा नहीं होगा, क्योंकि वे हमेशा से इससे इनकार करते आ रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।" रीयर एडमिरल (सेवानिवृत्त) राजा मेनन के अनुसार, हेडली द्वारा किए गए खुलासे 'वास्तविक' हैं, लेकिन पाकिस्तान 'हमेशा पाकिस्तान या दुनिया के किसी भी अन्य हिस्से में आतंकवादी हमलों में हाथ होने से इनकार करता रहेगा।' उन्होंने कहा, "वे कहेंगे कि हेडली वही कह रहा है जो उससे कहलवाया जा रहा है, क्योंकि वह अभी जेल में है। लेकिन इससे यह सच नहीं छिप सकता कि पाकिस्तान आतंकवादी हमलों में शामिल रहा है।"
एक अन्य सुरक्षा विशेषज्ञ अरुण सहगल का कहना है कि 'हेडली के बयान काफी तार्किक हैं और यह कहना कि वह वही बातें कह रहा है जो उससे कहलवाया जा रहा है, गलत है क्योंकि वह भारत की जेल में कैदी नहीं है।' सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील के. टी. एस. तुलसी ने हेडली के बयानों को 'दोषमुक्त किए जा सकने वाला' बयान बताया और कहा कि न्यायालय में इस तरह के बयानों को काफी विश्वसनीय माना जाता है। तुलसी ने आईएएनएस से कहा, "इन बयानों का खंडन नहीं किया जा सकता और पूरी दुनिया को एकजुट होकर पाकिस्तान पर आतंकवादी गतिविधियां बंद करने का दबाव डालना होगा।" सुरक्षा विशेषज्ञ सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर एस. के. चटर्जी ने भी यही विचार व्यक्त किए और कहा कि हेडली के बयान भारत के उन तर्को को सही साबित करता है कि पाकिस्तान, भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त रहा है।
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