नई दिल्ली: उत्तराखंड में दो दिन की बारिश ने पचास करोड़ रूपयों का नुकसान कर दिया है। पहाड़ी हिस्सों में कल और परसों जोरदार बारिश हुई जिसकी वजह से कई सड़कें टूट गई पुल बह गये और नदियां उफान पर आ गयीं। हालांकि आज मौसम साफ रहने से खतरा टलता नजर आया लेकिन फिर भी चार धाम यात्रा में मुश्किलें खड़ी हो गईं। सीएम हरीश रावत का दावा है कि चार धाम यात्रा रोकी नहीं गयी, लेकिन यात्रा मार्ग इतने जगह से टूट गये कि तीर्थयात्री जगह जगह फंस गये। आज दिन भर तीर्थयात्रियों को निकालने का काम जारी रहा। कई श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया।
कर्णप्रयाग में पिंडर नदी का रौद्र रूप नदी में इतना उफान है कि इसके रास्ते में जो आया वो तिनके की तरह बह गया। एंबिंयस नदी से उठते शोर से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि नदी किस रफ्तार से बह रही होगी। पहाड़ों में पिछले दो दिनों में हुई भारी बारिश ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों को तबाही के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
दो दिन की बारिश पड़ी भारी
दो दिन की बारिश ने स्थानीय लोगों के अलावा चार धाम यात्रियों की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जगह जगह लैंड स्लायड हुए, सड़कों पर मलवा आ गया, कई जगह बरसाती नाले सड़कों को बहा ले गये तो कहीं पुल नदियों में समा गये।
मंदाकिनी नदी का भयानक शोर और गति नदी किनारे रहने वालो के दिलो की धड़कन बढ़ा रही है। दो साल पुराना डर एक बार फिर लौट आया है। सोनप्रयाग का ये पुल मंदाकिनी नदी के गुस्से का शिकार बना। फिलहाल सही सलामत नजर आ रहा ये पुल अब मंदाकिनी में समा चुका है। ये पुल सोनप्रयाग को केदारनाथ से जोड़ता था। 2013 की तबाही में भी ये पुल क्षतिग्रस्त हो चुका था। दो साल बाद फिर ये पुल टूट चुका है। इस पुल की वजह से सोनप्रयाग में आठ सौ तीर्थयात्री फंस गये। जबकि तीन हजार तीर्थयात्री हेमकुंड में फंस गये। हालांकि स्थानीय प्रशासन की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है।
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