नई दिल्ली: आपने फिल्मों में देखा होगा कि जब भी हीरो को गोली लगती है तो खंजर या गर्म लोहा उसके जख्मों पर लगाया जाता है। लेकिन अगर आपको बताया जाए कि ऐसा असल जीवन में भी होता है तो आपको जानकर हैरानी होगी। आज भी देश के कई ग्रामीण इलाकों में लोग लोहे की गर्म सलाकों से दगवाकर बीमारियों का इलाज करवाते हैं। इस तरह का इलाज देश के कईं इलाकों में होता है जिसे अलग-अलग नाम से जाना जाता है। आपको बता दें कि राजस्थान में इस तरीके को 'दागना या डाली देना' कहते है तो छत्तीसगढ़िया बोलचाल की भाषा में इसे 'आंकना' कहते हैं। इस तरीके से इलाज करने वाले मानते हैं कि इससे बीमारियां पूरी तरह से ठीक हो जाती है।
बीमारी से ग्रस्त लोग इस उपचार को ठीक मानते हैं लेकिन डॉक्टर इलाज के इस तरीके को काफी खतरनाक व जानलेवा मानते हैं। छत्तीसगढ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले के हर पांच-दस गांव में एक ऐसा वैद्य आपको मिल जाएगा, जो कथित रूप से आंककर ही कई रोगों का इलाज करता है। राजस्थान में भी कई प्रकार की बीमारियों का इलाज इसी प्रथा के द्वारा किया जाता है। लेकिन अब समय बदल चुका है और धीरे-धीरे ये प्रथा भी लगभग विलुप्त सी हो गई है लेकिन बुजुर्गों के हाथों और कंधों पर दागने के निशान साफ देखें जा सकते है।
लोग बताते हैं कि वे लोहे या चिमटे को गर्म कर उससे लोगों के शरीर के उन हिस्सों को दागते हैं, जहां तकलीफ होती है। वे कहते हैं कि वैद्य लकवा, गठिया वात, मिर्गी, बाफूर, अंडकोष, धात रोग, बेमची, आलचा सहित कई अन्य रोगों का इलाज करते हैं।
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