आतंकी कैंपों में ट्रेनिंग के चारों हिस्से पूरे होने के बाद आतंकवादियों की बाकायदा स्क्रीनिंग की जाती है। स्क्रीनिंग करने के बाद मिशन को अंजाम देने के वास्ते लांच कैंप में भेजा जाता है। जम्मू-कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल से सटे कई ऐसे लांच कैंप हैं जहां से आतंकवादियों की घुसपैठ कराई जाती है।
कश्मीर के कुपवाड़ा-बारामुला से सटे काला पहाड़, फारवर्ड कुहाटा, महिंदा टॉप में तमाम आतंकी लांच कैंप मौजूद हैं। इसके अलावा जम्मू के पुंछ, आरएस पुरा, राजौरी सेक्टर से भी घुसपैठ कराई जाती है।
इन कैंपों में काफी मात्रा में हथियार, खाने-पीने का सामान, नक्शे और गोला बारूद होता है। पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत में भी ट्रेनिंग कैंप हैं हालांकि इन कैंपों में पहले अफगानिस्तान में लड़ने के लिए आतंकी तैयार किए जाते थे लेकिन बाद में यहां प्रशिक्षित आतंकियों को पीओके के लांच कैंप में भी भेजा जाने लगा।
इन आतंकी कैंपों को चला रहे संगठन वक्त के साथ अपनी रणनीति बदलते रहते हैं। किसी भी बड़े हमले के बाद अगर पाकिस्तान सरकार दबाव बनाती है तो ये संगठन अपना नाम बदलकर फिर से काम शुरू कर देते हैं।
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