नई दिल्ली: भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ (RA&W) के पूर्व प्रमुख एएस दुलत का कहना है कि दिसंबर 1999 में जब इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 को आतंकियों ने अगवा कर अपने पांच साथियों की रिहाई की मांग की तो जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भड़क उठे।
दुलत ने यह भी दावा किया कि अब्दुल्ला किसी भी सूरत में आतंकियों को रिहा नहीं होने देना चाहते थे। यहां तक कि वह सीएम के पद से इस्तीफा तक देने के लिए तैयार थे।
उन्होंने यह भी कहा कि जब जहाज अमृतसर में उतरा तो ना ही केंद्र सरकार और ना ही पंजाब सरकार कुछ फैसला कर पाई। नतीजा यह हुआ कि पांच घंटों तक सीएमजी की मीटिंग होती रही और प्लेन अमृतसर से उड़ गया और इस तरह आतंकियों पर काबू पाने का मौका देश ने गंवा दिया। बाद में सभी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगे।
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गुजरात दंगों के उपर दुलत ने अपनी किताब 'कश्मीर: द वाजपेयी ईयर्स' में कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2002 के दंगे को लेकर अपनी नाराजगी जताई थी और इसे एक गलती करार दिया था।
दुलाट ने कहा कि यह बात वाजपेयी के साथ एक बैठक के समय की है।
दुलाट ने वाजपेयी के साथ अपनी आखिरी बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि, उनके मुताबिक उस बैठक में वाजपेयी ने गुजरात दंगों के संदर्भ में कहा कि वो हमारे से गलती हुई है।
दुलाट साल 2000 तक रॉ के प्रमुख रहे और बाद में वाजपेयी के समय प्रधानमंत्री कार्यालय में कश्मीर मुद्दे पर विशेष सलाहकार थे।
दुलत ने अपनी किताब में साल 1989 की उस घटना का भी जिक्र किया है, जब मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया को आतंकियों ने अगवा कर लिया था और बदले में पांच आतंकियों को छोड़ना पड़ा था। उन्होंने लिखा है कि तब वह (दुलत) आईबी चीफ थे।
दुलाट के अनुसार मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद आतंकवादियों के निशाने पर नहीं थी, बल्कि अब्दुल्ला की बेटी सफिया आतंकवादियों के निशाने पर थी।
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