कोलकाता: IIT खड़गपुर के हर विभाग में बीटेक में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाले छात्र ने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी का लुभावनी पेशकश अस्वीकार करते हुए अकादमिक क्षेत्र से जुड़े रहने का फैसला किया है।
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के छात्र शिखर पत्रनबीस ने इस साल 9.87 प्वाइंट हासिल किए हैं और वह इस साल सबसे ज्यादा स्कोर हासिल करने वाला छात्र है। ऐसी सूचना है कि उसे प्रेजीडेंट ऑफ इंडिया गोल्ड मेडल से नवाजा जा सकता है।
शोध के प्रति उसके रूझान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोसॉफ्ट की ओर से मिले मोटे वेतन की नौकरी का प्रस्ताव भी उसका ध्यान भटका नहीं सका।
शिखर ने IIT परिसर में ही रहते हुए किसी बड़े सिस्टम में लगे कंप्यूटर :एंबेडेड सिस्टम: के हार्डवेयर की सुरक्षा पर पीएचडी करने का फैसला किया है।
शिखर ने PTI को बताया, मैं कभी बीटेक के बाद कॉरपोरेट कंपनी में नहीं जाना चाहता था। मेरी रूचि शोध और अकादमिक क्षेत्र मंे है और मैं यही करना चाहता हूं। इस बारे में मेरी कोई दूसरी राय नहीं रही। मेरे सभी शिक्षकों और मेरे परिवार ने इस फैसले में मेरा साथ दिया है।
शीर्ष अंक हासिल करने वाले छात्रों में शिखर जैसे छात्र कम संख्या में ही हैं जो अकादमिक जगत पसंद कर रहे हैं। अधिकतर छात्र कॉरपोरेट जगत में नौकरी करने जा रहे हैं।
शीर्ष अंक हासिल करने वालों में शिखर के साथ केवल अनिरबान संतारा होंगे, जो IIT में पीएचडी शोधार्थी बनने वाले हैं। संतारा इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इलेक्ट्रॉनिक कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग के छात्र रहे हैं।
IIT खड़गपुर के निदेशक पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती ने कहा, यह चलन रहा है कि उंची रैंक वाले एक-दो छात्र पीएचडी के लिए आईआईर्टी में रूकते हैं लेकिन शीर्ष रैंकर यहां रूक जाएं, ऐसा तो दुर्लभ ही है।
चक्रवर्ती ने कहा कि यह संस्थान सभी स्नातकों को अनुसंधान क्षेत्र में जाने के लिए प्रोत्साहित करता है लेकिन अधिकतर इंजीनियर नौकरी का विकल्प चुनते हैं। विग्यान शाखा के कुछ छात्र रूक जाते हैं।
IIT निदेशक ने कहा, हमने शीर्ष स्तर के सभी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की एक सूची तैयार की है। यदि हमारे किसी भी छात्र का कोई शोधपत्र वहां चुना जाता है तो हम पूरी आर्थिक मदद करते हैं। इसके अलावा हमने दोहरी पीएचडी के लिए अन्य विश्वविद्यालयों के साथ सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया भी शुरू की है।
शिखर ने कहा, अनुसंधान और अकादमिक क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण हैं। हालांकि मैं नहीं जानता कि अंतत: मैं अपना करियर किसमें बनाने वाला हूं लेकिन निश्चित तौर पर मेरा झुकाव शिक्षण के प्रति है। अकादमिक क्षेत्र मेरा जुनून है और मैं इसे अपनाना चाहता हूं।
उच्च स्तरीय शोध के प्रति छात्रों की रूचि में कमी भारत से होने वाले नवोन्मेष एवं पेटेंट के पंजीकरण की संख्या बेहद कम होने के लिए जिम्मेदार है।
शिक्षाविदों का कहना है कि चूंकि उद्योग जगत लगभग सारे होशियार छात्रों को ले जाता है, ऐसे में शीर्ष संस्थानों को भी अच्छे शिक्षक रखने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।
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