केरल के मलापुरम ज़िले में वानदूर की मशहूर पल्लीक्कुन्नू जामा मस्जिद में नमाज़ का समय बताने के लिए किसी लाउडस्पीकर से नहीं बल्कि नगाड़ा बजाकर लोगों को सूचित किया जाता है और ये परंपरा 200 साल पुरानी है।
आपको बता दें देश में लगभग हर जगह लाउडस्पीकर के ज़रिये लोगों को नमाज़ के लिए बुलाया जाता है लेकिन इस मस्जिद में नगाड़ा इस्तेमाल किया जाता है। राज्य में किसी और मस्जिद में नगाड़ा नहीं बजाया जाता। नगाड़ा बकरे की खाल का बना होता है। मुसलमान पांच बार नमाज़ पढ़ते हैं और नगाड़ा भी पांच बार एक धुन में बजाया जाता है। नमाज़ के अलावा रमज़ान में सेहरी (रोज़ा रखने) भी नगाड़ा बजाया जाता है।
सुन्नी स्कॉलर मौलाना नजीब मौलवी के अनुसार नगाड़ा बजाने की परंपरा बहुत पुरानी है। इस्लाम में अज़ान के चलन के पहले पैग़ंबर मोहम्मद के अनुयायियों ने धार्मिक कार्य के लिए लोगों को बुलाने हेतु एक अन्य वाद्य यंत्र नाकोस के इस्तेमाल के बारे में सोचा था। ये वाद्य यंत्र ईसाई लोगों को जमा करने के लिए बजाया करते थे।
नजीब मौलवी ने बताया कि आधुनिक ज़माने में घड़ियां आ गई हैं लेकिन हम आज भी नगाड़ा बजाकर लोगों को नमाज़ के लिए बुलाते हैं। इफ़्तार (रोज़ा खोलने) के लिए आज भी यहां गोला दाग़ा जाता है।
(फ़ोटो साभार अंग्रेज़ी दैनिक द हिंदू)
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