नई दिल्ली: सरकार ने मंगलवार को बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के एक हालिया मूल्यांकन में दिल्ली में वाहनों को चलाने की सम-विषम योजना के दूसरे चरण के दौरान अधिकतर निगरानी वाले स्थानों पर प्रदूषणकारी तत्वों की सघनता में इजाफा होने का संकेत मिला। पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया, सीपीसीबी के मूल्यांकन में सम-विषम योजना में अधिकतर निगरानी वाले स्थानों पर प्रदूषणकारी तत्वों की सघनता में इजाफा होने का संकेत मिला।
उनसे प्रश्न किया गया था कि क्या सीपीसीबी ने दिल्ली में खासतौर पर सम-विषम योजना के दूसरे चरण में प्रदूषण के स्तर को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को कोई रिपोर्ट सौंपी है। इसका जवाब मंत्री ने हां में दिया। दवे ने कहा कि एनजीटी ने इस साल चार जुलाई को कहा था कि सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार सम-विषम योजना के क्रियान्वयन की अवधि के दौरान दिल्ली में वायु की गुणवत्ता उस समय से अधिक खराब पाई गई, जब यह पाबंदी लागू नहीं थी।
उन्होंने कहा, एनजीटी ने यह भी कहा कि सम-विषम योजना की अवधि के दौरान पीएम 2.5 का औसत मूल्य योजना से पहले की अवधि से अधिक था। पर्यावरण मंत्री ने बताया कि सीपीसीबी को देश में प्रदूषण संबंधी कानूनों के उल्लंघन के मामले में पिछले तीन साल में और मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक कुल 3417 शिकायतें मिली हैं।
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