नई दिल्ली: सरकार की ओर से पाकिस्तान के साथ 56 साल पुरानी सिंधु जल संधि की समीक्षा किए जाने के साथ विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा कि भारत ने अब तक इस संधि का उपयोग जम्मू-कश्मीर में सिंचाई और पनबिजली क्षमता को बढ़ाने के लिए पूरी तरह से नहीं किया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि अगर इस्लामाबाद अपने किसी भी वादे को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है तो उसे नई दिल्ली से भी उन वादों पर खरा उतरने की तवज्जो नहीं करनी चाहिए।
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पूर्व जल संसाधन सचिव ध्रुव विजय सिंह ने कहा, ‘इस संधि का पूरी तरह उपयोग किया जाए। हमें पनबिजली क्षमता के निर्माण और सिंचाई के लिए पानी के उपयोग की अनुमति है। समझौते के तहत हमें उससे कहीं ज्यादा की इजाजत है जो अब तक हमने किया है।’ उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लिए सिंधु का और अधिक पानी की मांग करते हुए राज्य विधानसभा में दो प्रस्ताव पारित किए गए थे। सिंह ने कहा, ‘हम सिंचाई के लिए और बहुत कुछ कर सकते हैं। संधि की जो शर्तें भारत के पक्ष में हैं उनका और दोहन करने की जरूरत है।’
एक पूर्व सिंधु आयुक्त ने कहा कि भारत के फायदे के लिए इस संधि का उपयोग करने का सरकार का फैसला सही दिशा में उठाया गया कदम है। यशवंत सिन्हा ने भी सिंधु पर लिखते हुए कहा है, ‘आतंकवादी हम पर हमला करते रहते हैं, हम विकल्पों पर विचार करते रहते हैं। यह कभी नहीं खत्म होने वाली कहानी है। मैं कार्रवाई के पक्ष में है और मैं यह कह रहा हूं कि इस बार भारत को कार्रवाई करनी चाहिए।’
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