इस्लामाबाद/नई दिल्ली: एक आकस्मिक घटनाक्रम के तहत भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिव आज मिलेंगे और इस दौरान पठानकोट आतंकी हमले सहित द्विपक्षीय मुद्दों को प्रभावित कर रहे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी मुख्य रूप से हार्ट ऑफ एशिया के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए एक दिन के दौरे पर यहां आएंगे। इस्लामाबाद में इसकी घोषणा की गयी है। बैठक से इतर चौधरी अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे जिसमें द्विपक्षीय संबंधों और ठप पड़ी द्विपक्षीय समग्र वार्ता :सीबीडी: की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार बातचीत में मुख्य ध्यान पठानकोट आतंकी हमले की जांच और इस संबंध में एनआईए की टीम के संभावित पाकिस्तान दौरे पर दिया जाएगा। पिछले साल दिसंबर में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के इस्लामाबाद में सीबीडी की घोषणा करने के बाद से जयशंकर और चौधरी के बीच यह पहली औपचारिक बैठक होगी।
पाकिस्तान शांति वार्ता को बहाल करने की भी मांग करेगा जिस पर दिसंबर में सहमति बनी थी।’ यह पिछले साल दिसंबर में इस्लामाबाद में विदेश सचिवों द्वारा द्विपक्षीय समग्र वार्ता की घोषणा के बाद जयशंकर और चौधरी के बीच पहली औपचारिक बैठक होगी। इस साल मार्च में नेपाल में दक्षेस बैठक के दौरान दोनों विदेश सचिवों के बीच अनौपचारिक संक्षिप्त वार्ता हुई थी।
वैसे पाकिस्तानी सूत्रों ने बताया कि पठानकोट आतंकवादी हमले और पाकिस्तान में एक कथित भारतीय जासूस की गिरफ्तारी के साये में हो रही इस भेटवार्ता में किसी बड़ी उपलब्धि की संभावना नहीं है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेगा। वैसे उसने चौधरी की जयशंकर के साथ बैठक का कोई उल्लेख नहीं किया।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि पाकिस्तान ‘हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल प्रोसेस’ में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है जिसे अफगानिस्तान, उसके पड़ोसियों ओर क्षेत्रीय देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी समेत क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा के मंच के तौर पर 2011 में स्थापित किया गया था ताकि अफगानिस्तान में स्थायी शांति एवं स्थायित्व को बढ़ावा मिले।
पाकिस्तान ने 9 दिसंबर 2015 को इस्लामबाद में पांचवें हार्ट ऑफ एशिया मंत्रिस्तरीय सम्मेलन की मेजबानी की थी। उस सम्मेलन में ‘सुरक्षा खतरों से निपटने एवं क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर’ शीर्षक से इस्लामाबाद घोषणा पत्र को पारित किया गया था।
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