नयी दिल्ली: रेलवे की नयी समयसारिणी में न केवल ट्रेनों की तेज गति का उल्लेख है बल्कि इसमें पूरे देश में यात्रियों की अधिक सुरक्षा के लिए प्रतिदिन मरम्मत कार्य के लिए घंटे निर्धारित किये गए हैं। समयसारिणी 2017-2018 बुधवार से प्रभावी हो गई जो यह दिखाती है कि समयसारिणी को इस तरह से डिजाइन किया गया है ताकि इंजीनियरों और नियमित रखरखाव कार्य में लगने वाले अन्य कर्मियों को इस कार्य के लिए दो से चार घंटे का वक्त मिले। मरम्मत कार्य रेल पटरियों, सिगनलिंग गियर या पटरी के ऊपर से गुजरने वाले बिजली के तारों के लिए तय होगा।
रेलवे की नयी समयसारिणी में 90 ट्रेनों को सुपरफास्ट श्रेणी में रखा है। रेलवे ऐसा इसलिए कर रहा है क्योंकि यात्री जल्द से जल्द मंजिल तक पहुंच पाएं। ट्रेनों की टाइमिंग में 15 मिनट से लेकर 2 घंटे तक कम किया गया है। भारतीय रेल लंबी दूरी वाली 700 ट्रेनों की कुल यात्रा अवधि को कम कर दिया है।
बता दें, रेलवे ने 3 साल में करीब 150 ट्रेनों को सुपरफास्ट का दर्जा दिया है। इनमें से ज्यादातर आज भी एक्सप्रेस के टाइम से ही चल रही हैं। आपको ये भी बताते चलें कि सुपरफास्ट होने पर रेलवे स्लीपर में 30 और एसी में 45 से 75 रुपये प्रति यात्री वसूलता है। यानी ट्रेन की स्पीड का पूरा असर जेब पर पड़ेगा।
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