नई दिल्ली: इशरत जहां मामले से जुड़ी फाइल गायब होने के मामले की जांच कर रहे एक आयोग ने बड़ा बयान दे दिया है। आयोग का कहना है कि इस मामले से जुड़े पेपर 18 और 28 सितंबर, 2009 के बीच गुम हो गए थे अथवा हटा लिए गए थे, इस वक्त पी चिदंबरम गृह मंत्री थे। आपको बता दें कि इशरत जहां मामले में गुमशुदा फाइलों पर गृह मंत्रालय की आंतरिक जांच रिपोर्ट पेश की जा चुकी है। इसमे केवल एक फाइल का पता चला है जबकि शेष दो फाइलों का अभी तक पता नहीं चला। गौरतलब है कि इशरत जहां मामले से जुड़ी फाइलें गुम होने से अब शक की सुई चिदंबरम पर टिक गई है।
पिल्लई के दावे को झूठा बता चुके हैं चिदंबरम
पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि तत्कालीन गृह सचिव जी के पिल्लई ने इशरत जहां मामले से जुड़े कागजात कम से कम तीन बार देखा था और आश्चर्य जताया कि केवल वही कागजात क्यों गुम हो गए जिनसे साफ हो जाता कि पूर्व नौकरशाह झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा, फाइल (तत्कालीन) गृह सचिव की मेज से कम से कम तीन बार गुजरी थी। अपनी किताब स्टैंडिंग गार्ड: ए ईयर इन अपोजिशन के विमोचन के मौके पर कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने भाषा की गुणवत्ता में सुधार के लिए केवल मामूली संपादन किया था।
चिदंबरम ने स्पष्ट करते हुए कहा, मसौदा जब एजी (अटार्नी जनरल) के पास से आया, जब उन्होंने मेरे पास भेजा और जब मैंने इसे वापस भेजा। कम से कम तीन बार फाइल उनके (पिल्लई) पास गई और अब वह कह रहे हैं कि वो कागजात गायब है। जांचे गए मसौदा के गायब होने से किसका फायदा है? मैं चाहता था कि मसौदा एजी जांचें। उन्होंने कहा, (एजी) देश के शीर्ष कानूनी अधिकारी थे। अगर एजी का जांचा गया मसौदा प्रस्तुत हो तो साबित हो जाएगा कि देश के शीर्ष कानूनी अधिकारी एजी ने मसौदा देखा। मैंने कुछ नहीं छिपाया है और मुझे उम्मीद है कि रहस्य से परदा उठ चुका है।
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