नई दिल्ली: गुजरात के IPS अफ़सर संजीव भट्ट को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। गुजरात सरकार ने बुधवार को उन्हें बिना इजाज़त ग़ैर हाज़िर रहने के आधार पर नौकरी से हटाया है। सरकार ने कहा कि संजीव भट्ट की पोस्टिंग जूनागढ़ में की गई थी, लेकिन काफी वक्त बीतने के बावजूद उन्होंने जूनागढ़ में जॉइनिंग नहीं की। संजीव भट्ट 1988 बैच के IPS ऑफिसर हैं।
संजीव भट्ट को 2011 में संस्पेंड किया गया था। उस वक्त भी उन्हें बिना इजाज़त काम से गैरहाजिर रहने और सरकारी गाड़ी का ग़लत इस्तेमाल करने के आधार पर संस्पेंड किया गया था। सरकार के मुताबिक जूनागढ़ में पोस्टिंग होने के बावजूद वह अहमदाबाद में रहे और वहां सरकारी गाड़ी और पुलिस कमांडो का प्रयोग करते रहे।
संजीव भट्ट ने साल 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों को लेकर तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
संजीव भट्ट का PM मोदी पर आरोप:
भट्ट ने दावा किया था कि मोदी ने एक बैठक के दौरान पुलिस अधिकारियों को हिंदुओं को अपने गुस्से का इजहार करने देने को कहा था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच टीम ने उनके इस दावे को खारिज कर दिया था।
फेसबुक पर अपनी बर्खास्तगी की वजह को बताया झूठा
फेसबुक पर उन्होंने अपनी बर्खास्तगी की वजह को झूठा बताते हुए सरकार के आरोपों को गलत और इकतरफा करार दिया है। साथ ही ट्वीट कर उन्होंने लिखा है कि 27 साल तक इंडियन पुलिस सर्विस को सेवा देने के बाद आखिरकार मैं हटा दिया गया हूं, फिर से नौकरी के योग्य हो गया हूं, कोई लेगा मुझे।
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