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क्‍या है ISBN नंबर और यह हर लेखक-प्रकाशक के लिए क्यों है जरूरी?

प्रकाशकों और लेखकों के लिए ISBN नंबर को होना बेहद जरूरी होता है और अभी तक जो व्‍यवस्‍था थी उसके अनुसार इस नंबर के लिए काफी दिनों तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन सरकार ने इस संबंध में बड़ी पहल करते हुए एक वेबसाइट की शुरुआत की है।

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ISBN no

नई दिल्ली: प्रकाशकों और लेखकों के लिए ISBN नंबर को होना बेहद जरूरी होता है और अभी तक जो व्‍यवस्‍था थी उसके अनुसार इस नंबर के लिए काफी दिनों तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन सरकार ने इस संबंध में बड़ी पहल करते हुए एक वेबसाइट की शुरुआत की है। प्रकाशक, लेखक अब सिर्फ सात दिनों में आईएसबीएन नंबर पा सकते हैं।

ऑनलाइन करना होगा आवेदन:

प्रकाशन समूह और लेखक अब आईएसबीएन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और यह हफ्ते भर के अंदर उन्हें मिल जाएगा। 13 अंकों वाला यह कोड प्रकाशनों की पहचान के लिए होता है। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृत ईरानी ने गुरुवार को एक वेबसाइट का शुभारंभ किया, जो प्रक्रिया को सरल बनाएगा और आईएसबीएन हासिल करने की अवधि को घटाएगा जिसमें आम तौर पर कुछ महीने लगते हैं। 

कैसे आया आइडिया?
स्मृति ने बताया, मुझे यह विचार उस वक्त आया जब एक पत्रकार ने मुझसे कहा कि उसकी मां लेखिका है, लेकिन छह माह से अपनी पुस्तक प्रकाशित नहीं करा पा रही हैं क्योंकि उन्हें आईएसबीएन नंबर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा, विभाग को प्राप्त होने वाले आवेदनों में से कुछ को ही समय पर पूरा किया जाता है क्योंकि समूची प्रक्रिया कठिन है। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल का उपयोग कर प्रकाशक और अपनी किताबें खुद छापने के इच्छुक लेखक हफ्ते भर के अंदर आईएसबीएन हासिल करने में सक्षम होंगे। जब तक आवेदक की पहचान साबित करने की जरूरत नहीं होगी तब तक दस्तावेजों की कागजी प्रति की भी जरूरत नहीं होगी। 

क्‍या है ISBN नंबर?
गौरतलब है कि आईएसबीएन एक विशिष्ट नंबर है जिसका इस्तेमाल विषय आधारित मोनोग्राफिक प्रकाशनों की पहचान करने में होता है। 13 अंकों वाला यह नंबर ब्रिटेन स्थित अंतरराष्ट्रीय आईएसबीएन एजेंसी आवंटित करती है जो बार कोड के रूप में होता है। 

फ्री में दिया जाता है कोड:
फिलहाल लेखकों, प्रकाशकों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए अलग अलग फॉर्म हैं, जिन्हें भरकर जरूरी दस्तावेज के साथ भेजना होता है और यह कोड निशुल्क जारी किया जाता है।

अमीश त्रिपाठी  20 प्रकाशकों ने किया था खारिज, ISBN के लिए करना पड़ा था इंतजार:

इस अवसर पर ख्‍यात लेखक अमीश त्रिपाठी भी उपस्थित थे जिन्होंने बताया कि उनकी पहली पुस्तक को 20 प्रकाशकों ने खारिज कर दिया था और जब उन्होंने खुद इसे छापने का फैसला किया तो उन्हें आईएसबीएन नंबर के लिए दो महीने से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा।

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