नई दिल्ली: इशरत जहां मामले पर चल रही बहस में कूदते हुए पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और भाजपा सांसद आर के सिंह ने आज दावा किया कि विवादित इशरत मामले पर हलफनामे में राजनीतिक वजहों से बदलाव किए गए थे। सिंह ने बताया, ‘बड़ा सवाल यह है कि किसने बदलाव करने के लिए कहा और किस वजह से कहा। निश्चित तौर पर इसमें राजनीति की गई थी।’
सिंह से पहले गृह सचिव रहे जी के पिल्लई ने कहा है कि पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने हलफनामे में बदलाव कराया था। उन्होंने कहा कि मूल हलफनामे में इशरत और मुठभेड़ में मारे गए उसके अन्य साथियों को लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी करार दिया गया था।
बिहार से भाजपा सांसद सिंह ने कहा कि जब खुफिया ब्यूरो ने कह दिया था कि इशरत के तार लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों से जुड़े थे, तो हलफनामे में बदलाव की क्या जरूरत थी। उन्होंने कहा, वह अपने साथी जावेद शेख को जानती थी, उस जावेद के रिश्ते आतंकवादियों से थे। वह जावेद के साथ दो जगहों पर गई। वह जानती थी कि वह जावेद के साथ क्या कर रही है।
पिल्लई ने रविवार को दावा किया था कि यूपीए सरकार के दौरान गृह मंत्री रहे कांग्रेस नेता चिदंबरम ने उच्चतम न्यायालय में मूल हलफनामा दाखिल करने के एक महीने बाद वह फाइल वापस मंगवा ली थी जिसमें इशरत और उसके साथियों को लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य करार दिया गया था।
चिदंबरम ने कल कहा था कि इशरत मुठभेड़ मामले में दूसरा हलफनामा पूरी तरह सही था और मंत्री के तौर पर मैं जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए तैयार हूं। चिदंबरम ने इस बात पर निराशा जताई कि पिल्लई ने हलफनामा मुद्दे से दूरी बना ली जबकि इसमें वह भी बराबर के जिम्मेदार थे।
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