इसरो ने 6 उपग्रहों के साथ किया रॉकेट का सफल प्रक्षेपण
चेन्नई: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार शाम छह बजे सिंगापुर के छह उपग्रहों के साथ पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) रॉकेट का प्रक्षेपण कर दिया। रॉकेट का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से

चेन्नई: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार शाम छह बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सिंगापुर के छह उपग्रहों के साथ ध्रुवीय प्रक्षेपण यान यानी पीएसएलवी-सीए रॉकेट का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसरो को इस सफलता पर बधाई दी है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पीएसएलवी-सी29 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो के अध्यक्ष एएस किरण कुमार को भेजे बधाई संदेश में कहा, "पीएसएलवी-सी29 के सफल प्रक्षेपण पर मैं आपको और इसरो की आपकी टीम को हार्दिक बधाई देता हूं। आज की उपलब्धि भारत की अंतरिक्ष में बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। इस महान मिशन में लगी आपकी टीम के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और अन्य लोगों को मेरी ओर से बधाई दे दें।"
इस पीएसएलवी-सीए रॉकेट की लंबाई 44.4 मीटर और भार लगभग 227 टन है। प्रक्षेपण के बाद निचले सिरे से निकलती भयंकर नारंगी लपटों के साथ बुधवार शाम इस रॉकेट ने आसमान में प्रवेश किया। इन 6 उपग्रहों के प्रक्षेपण के अलावा इसरो राकेट के इंजन की योग्यता की भी जांच करेगा। अंतरिक्ष विभाग के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "उपग्रहों को अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित करने के लिए रॉकेट इंजन को दोबारा चालू और बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
एक ही रॉकेट से कई उपग्रहों का प्रक्षेपण इसरो के लिए नई बात नहीं है। वह इससे पहले भी यह कर चुका है। लेकिन एक ही रॉकेट से कई उपग्रहों को अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित करने की क्षमता उसके पास नहीं है। यह प्रयोग इसरो अपने साथ ले जा रहे छह उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने के बाद करेगा। इस उद्योग के एक विशेषज्ञ ने आईएएनएस को बताया, "किसी भी रॉकेट को बंद करने के बाद शीघ्र ही उसे दोबारा शुरू करना एक जटिल तकनीक है। जिसमें हमें महारत हासिल करनी होगी। रॉकेट इंजन के सक्रिय होते ही बहुत तेज गर्मी उत्पन्न होती है। इस ऊष्मा से बचने के लिए रॉकेट को अंतरिक्ष में पहले बंद कर थोड़ा ठंडा किया जाएगा फिर शीघ्र ही इसे दोबारा शुरू किया जाएगा।"
विशेषज्ञ के अनुसार, रॉकेट को बंद करने और चालू करने की यह प्रक्रिया संचार उपग्रहों के इंजन से बिलकुल अलग है। संचार उपग्रहों के इंजन में यह अंतराल कुछ दिनों में पूरा होता है। लेकिन रॉकेट की स्थिति में यह प्रक्रिया मात्र घंटों में पूरी होगी। रॉकेट के ठंडा होने की स्थिति परीक्षण की सबसे जटिल हिस्सा होती है।
यह मिशन इसरो का इस साल 2016 का आखिरी मिशन है। इस वर्ष इसरो ने श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण स्थल से 14 उपग्रहों को लांच किया, जिनमें तीन उपग्रह भारत के और 11 दूसरे देशों के थे। इनमें से 13 उपग्रहों को जहां पीएसएलवी प्रक्षेपण यान द्वारा लांच किया गया, वहीं एक संचार उपग्रह 'जीसैट-6' को भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) के जरिए प्रक्षेपित किया गया।
पिछले ही महीने इसरो ने एक भारतीय संचार उपग्रह जीसैट-15 को यूरोपियन स्पेस एजेंसी द्वारा निर्मित एरियन रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया था। इसे मिलाकर इस वर्ष भारत द्वारा प्रक्षेपित किए जाने वाले उपग्रहों की कुल संख्या 21 हो जाती है।इसके अलावा इसरो भारतीय क्षेत्रीय दिशासूचक उपग्रह प्रणाली का विकास भी कर रहा है और भारतीय क्षेत्रीय दिशासूचक उपग्रह प्रणाली के विकास के तहत सात उपग्रहों का समूह स्थापित करने की योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार ने 1420 करोड़ रूपये का बजट मंजूर किया है।
लोकसभा में भोला सिंह और सुनील बलराम गायकवाड़ के एक प्रश्न के उत्तर में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि इसरो भारतीय क्षेत्रीय दिशासूचक उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) का विकास कर रहा है और इसके तहत सात उपग्रह प्रक्षेपित किये जाने की योजना है। इनमें से चार उपग्रह आईआरएनएसएस।ए,।बी,।सी और।डी प्रक्षेपित किये जा चुके हैं। मंत्री ने कहा कि शेष तीन उपग्रह आईआरएनएसएस।ई,।एफ और।जी को मार्च 2016 तक प्रक्षेपित करने की योजना है।