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न्याय में कुछ और देर, शुक्रवार तक टला गुलबर्ग सोसाइटी पर फैसला

गुजरात की गुलबर्ग सोसाइटी में (2002) हुए हत्याकांड पर फैसला अब एक और दिन के लिए टल गया है। न्याय की बांट जोह रहे लोगों को अब शुक्रवार का इंतजार करना होगा।

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नई दिल्ली: गुजरात की गुलबर्ग सोसाइटी में (2002) हुए हत्याकांड पर फैसला अब एक और दिन के लिए टल गया है। न्याय की बांट जोह रहे लोगों को अब शुक्रवार का इंतजार करना होगा। आपको बता दें कि इस अहम मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी अदालत के पूर्व में आए फैसले से संतुष्ट नहीं थीं।

क्या था अदालत का फैसला:
आपको बता दें कि साल 2002 में हुए गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड की जांच कर रही एसआईटी अदालत ने 02 जून को अपना फैसला सुनाया जिसमें 24 को आरोपी 36 को बेगुनाह बताया। इन 24 आरोपियों को क्या सजा होगी इसका फैसला अदालत शुक्रवार को करेगी। गौरतलब है कि इस घटना में कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी समेत करीब 69 लोग मारे गए थे।

क्या कहा जाकिया जाफरी ने:
गुलबर्ग सोसाइटी मामले में कोर्ट के फैसले पर दंगों की पीड़िता जाकिया जाफरी ने असंतोष जाहिर किया है, उन्होंने कहा कि यह आधा न्याय है, जिसे मिलने में भी 14 साल लग गए, जब तक जान है तब तक लडेंगे। जाकिया जाफरी ने कहा कि जिन लोगों को बरी किया गया उस फैसले के बारे में आगे और सोचना पड़ेगा। मुझे अफसोस है कि 36 लोगों को छोड़ दिया गया। मैंने अब तक अपनी लड़ाई लड़ी है। आगे भी लड़ूंगी। तीस्ता सीतलवाड़ और दूसरे वकील मेरे साथ हैं, वो मेरा केस लड़ेंगे।  
क्या है गुलबर्ग सोसाइटी हिंसा?

फरवरी, 2002 में हुए गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद के गुलबर्गा सोसाइटी पर दंगाइयों ने हमला किया था जिसमें कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान ज़ाफरी सहित 69 लोगों की जान गई थी। एहसान जाफरी उसी सोसाइटी में अपने परिवार के साथ रहते थे। 69 लोगों में से 39 लोगों के तो शव मिले लेकिन बाकी 30 शव नहीं जिन्हें सात साल बाद कानूनी परिभाषा के तहत मरा हुआ मान लिया गया।

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