नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने बुधवार को यह जानना चाहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नवंबर-दिसंबर के 'फाइल मूवमेंट रजिस्टर' रिकॉर्ड को क्यों जब्त किया? दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के संसद में दिए उस बयान को गलत बताया, जिसमें जेटली ने कहा था कि सीबीआई ने केजरीवाल के दफ्तर की जांच नहीं की।
सिसोदिया ने पूछा, "मुख्यमंत्री कार्यालय का फाइल मूवमेंट रजिस्टर जब्त किया गया है। अगर छापे का संबंध मुख्यमंत्री के मौजूदा कार्यकाल से नहीं है तो फिर रजिस्टर को क्यों जब्त किया गया?" सिसोदिया ने आरोप लगाया कि जेटली ने संसद को मूर्ख बनाया है। जेटली ने मंगलवार को संसद में कहा था कि सीबीआई ने केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर छापा मारा है और इसका संबंध कुमार के पहले के कार्यकाल से है।
उधर, सिसोदिया के आवास पर संवाददाताओं से बात करते हुए केजरीवाल ने भी कहा था, वह कहते हैं कि छापा मेरे प्रधान सचिव राजेन्द्रजी के खिलाफ 2007 से 2014 के दरम्यान एक खास फर्म को फायदा पहुंचाने के संबंध में था, जबकि वह शिक्षा सचिव, वैट आयुक्त, आईटी सचिव के पद पर रहे। यह मेरे हिसाब से एकदम झूठ है।
उन्होंने कहा, पर यह कार्रवाई इस मामले पर की गई हो, ऐसा नहीं लगता। अगर कुमार ने शिक्षा सचिव के तौर पर गलत तरीके से ठेके दिए थे तो सीबीआई को शिक्षा विभाग पर भी छापा मारना चाहिए था। मुख्यमंत्री ने कहा, सीबीआई को इन कथित ठेकों से जुड़ी कोई फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में नहीं मिलेगी क्योंकि मुख्यमंत्री कार्यालय में 10 से 15 दिन से ज्यादा पुरानी फाइलें नहीं रखी जातीं।
उन्होंने कहा, वह कथित फाइलें शिक्षा विभाग के रिकार्ड रूम में होंगी। अगर वैट से जुड़ा मामला है तो वह वैट विभाग के रिकार्ड रूम में होंगी, लेकिन उन्होंने शिक्षा अथवा वैट विभाग अथवा आईटी विभाग पर छापा नहीं मारा। वह जिन फाइलों की बात कर रहे हैं, उन्होंने वे दिल्ली सरकार से मांगी तक नहीं।
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