नई दिल्ली: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने 9 फरवरी के कार्यक्रम के संबंध में दी गई सजा के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के मातापिताओं को पत्र भेजकर उनसे कहा है कि वे अपने बच्चों को अनशन खत्म करने और संवैधानिक तरीके अपनाने के लिए कहें। हड़ताल के 15वें दिन आज ABVP के बागी प्रदीप नारवाल सहित तीन और छात्र अनिश्चितकालीन अनशन में शामिल हुए। प्रदीप ने भाजपा द्वारा इस मुद्दे से निपटने को लेकर मतभेदों के चलते फरवरी में छात्र संगठन से इस्तीफा दे दिया था। अन्य दो छात्र जेएनयू छात्र संघ उपाध्यक्ष शहला राशिद शोरा और एक साल के लिए छात्रावास से प्रतिबंधित किये गये जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व प्रमुख आशुतोष हैं।
इस बीच, महिला अधिकार एवं मानव कल्याण संगठनों के 40 सदस्यों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर उस विवादित कार्यक्रम के संबंध में छात्रों को दी गई सजा को खत्म करने की मांग की थी जिसमें कथित रूप से राष्ट्रविरोधी नारे लगे थे। स्वास्थ्य खराब होने पर कल एम्स में भर्ती कराई गई अनशन पर चल रहीं छात्रा श्वेता राज ने माता पिता को भेजे गये पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, अगर प्रशासन में हिम्मत है तो उसे हमसे बात करनी चाहिए, हमारे माता पिता को धमकाने वाले पत्र भेजकर उन्हें डराना नहीं चाहिए। हम वयस्क हैं और सचेत कार्यकर्ता हैं।
अब तक जेएनयू छात्र संघ प्रमुख कन्हैया कुमार तथा उमर खालिद सहित 13 छात्र अनशन से हट चुके हैं जबकि सात अन्य अब भी अनशन पर हैं। उमर और अनिर्बान भट्टाचार्य ने इस सप्ताह की शुरूआत में दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके सजा को चुनौती दी थी जबकि आठ अन्य छात्रों ने इस मुद्दे पर आज अदालत से गुहार लगाई।
प्रशासन ने कल छात्रों से हड़ताल खत्म करने की अपील की थी क्योंकि अब यह मामला अदालत में विचाराधीन है। विश्वविद्यालय ने अनशन पर बैठे छात्रों की मांगों पर गौर करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई थी। लेकिन छात्रों के अदालत जाने के बाद समिति अपना काम रोक सकती है।
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