नई दिल्ली: नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के बाहर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्र नेता उमर खालिद पर हुए कथित हमले की नेताओं, छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निंदा की है। उनका कहना है कि यह घटना सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया में उमर के खिलाफ ‘‘नफरत भरी मुहिम’’ चलाने का नतीजा है। चश्मदीदों के मुताबिक, कुछ अज्ञात लोगों ने जेएनयू के छात्र नेता को निशाना बनाया, गोलियों की आवाजें सुनाई दी, लेकिन उमर को कोई नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, पुलिस ने कहा है कि वह घटना की सत्यता का पता लगाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस हमले के खिलाफ ट्वीट किया और कहा, ‘‘लोगों के खिलाफ नफरत भरी मुहिम चलाइए। देर-सवेर किसी का मनोबल इतना बढ़ेगा कि वह कानून अपने हाथों में ले लेगा। उमर खालिद पर यह हमला सोशल और मुख्यधारा की मीडिया का इस्तेमाल कर चलाई जा रही नफरत भरी मुहिमों का सीधा नतीजा है। खुशी है कि वह ठीक है।’’
दलित नेता एवं गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को टैग करते हुए दावा किया कि ‘‘पिछले महीने जब उमर खालिद, शहला राशिद और मुझे जान से मारने की धमकियां मिली थीं तो हमने पुलिस सुरक्षा मांगी थी लेकिन आज की तारीख तक किसी ने हमें कोई सुरक्षा नहीं मुहैया कराई है।’’ मेवानी ने ट्वीट किया, ‘‘यहां तक कि भाजपा को राजनीतिक फायदे हासिल करने में मदद करने वाले और कन्हैया कुमार, उमर खालिद और शहला राशिद को ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ का सदस्य एवं ‘राष्ट्र विरोधी’ बताने वाले मीडिया समूह भी इस हमले के लिए जिम्मेदार हैं।’’
Jawaharlal Nehru University (JNU) student Umar Khalid
जेएनयू की छात्र नेता शहला राशिद ने इस घटना को ‘‘स्तब्ध’’ करने वाली और ‘‘निंदनीय’’ करार देते हुए कहा कि यह मीडिया की ओर से फैलाई जा रही नफरत का सीधा नतीजा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर ने कहा कि ऐसी घटनाओं के खिलाफ इंटरनेट पर सक्रिय लोगों को सड़कों पर उतरना चाहिए। गुरमेहर ने ट्वीट किया, ‘‘मैं कहना चाहती हूं कि मैं स्तब्ध और चकित हूं । यह वक्त है कि ऑनलाइन भीड़ सड़कों पर उतरे। और भगवान न करे कि कल किसी के साथ कोई घटना हो जाती है तो नफरत की पर्याप्त निंदा नहीं करने के कारण खून हमारे हाथों पर होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘गौरी लंकेश, कलबुर्गी, शुजात बुखारी और अब उमर खालिद पर हमला। इतिहास हमें बताता है कि यह पूरी तरह सामान्य, फलते-फूलते देश के युद्ध के मैदान में बदल जाने से पहले के चेतावनी के संकेत हैं। हम अब भी इतने बेपरवाह कैसे हैं?’’
समाजसेवी कविता कृष्णन ने उमर खालिद के खिलाफ ‘‘प्राणघाती हिंसा’’ के लिए कुछ न्यूज चैनलों को जिम्मेदार ठहराया। कृष्णन ने ट्वीट किया, ‘‘उमर खालिद की हत्या की स्तब्ध करने वाली कोशिश-दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के बाहर हुआ। यह प्राणघाती हिंसा न्यूज चैनलों पर उसे एवं अन्य को निशाना बनाकर चलाए जा रहे नफरते भरे भाषण और फर्जी खबरों का सीधा नतीजा है।’’
जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार ने ट्वीट किया, ‘‘देश में जंगल राज का इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि संसद भवन से थोड़ी दूर कभी संविधान की प्रतियां जला दी जाती हैं तो कभी उमर खालिद पर गोली चलाने जैसे अपराध को अंजाम दिया जाता है। सरकार के संरक्षण और गोदी मीडिया के प्रोत्साहन के कारण ही देश में अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ गया है।’’
बॉलीवुड अभिनेत्री एवं जेएनयू की पूर्व छात्रा स्वरा भास्कर ने भी ट्वीट किया, ‘‘हम क्या से क्या होते जा रहे हैं? कानूनविहीन अराजकता की स्थिति....हमारी संस्थाओं और एक जिम्मेदार राज्य की विश्वसनीयता के लिए काफी नुकसान पहुंचाने वाला।’’
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