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कल्‍पना चावला ने कहा था , “मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूं और इसी के लिए ही मरूंगी।”

नई दिल्ली: कल्‍पना चावला, जैसा नाम वैसी ही सपनों भरी जिंदगी, जो चाहा वह कर दिखाया और भारत की इस बेटी ने एस्‍ट्रोनॉट बनकर अपनी जिंदगी का एक मकसद तय किया और सफलता की एक

kalpana chawla

ऐसा था पहला मिशन
कल्पना चावला ने अपने पहले मिशन में 1.04 करोड़ मील का सफ़र तय कर के पृथ्वी की 252 परिक्रमाएँ कीं और अंतरिक्ष में 360 से अधिक घंटे बिताए। एसटीएस-87 के दौरान स्पार्टन उपग्रह को तैनात करने के लिए भी ज़िम्मेदार थीं, इस खराब हुए उपग्रह को पकड़ने के लिए विंस्टन स्कॉट और तकाओ दोई को अंतरिक्ष में चलना पड़ा था।

कल्पना की दूसरी उड़ान 16 जनवरी 2003 में शुरू हुई थी। यह मिशन मिशन 16 दिन का था। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने 2 दिन काम किया और 80 दिन परिक्षण। 1 फरवरी 2003 में कोल्बियां स्पेस शटल लेंड़िंग से पहले ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया इसमें कल्पना और बाकी 6  अंतरिक्ष यात्रियों की भी मौत हो गई। उनकी इस उड़ान को देखने के लिए उनके माता-पिता भी भारत से अमेरिका आए थे।

1. 1994 में कल्पना का अंतरिक्ष यात्री के रूप में चयन हुआ था।

2. फ्रांसीसी जान पियर से उनकी शादी हुई थी जो पेशे से फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे।

3. स्पेस शटल की यह 13वीं उड़ान थी।

4. यह मिशन अल्फा स्टेशन की असेंबली के लिए नहीं था।

5. कैनेडी स्पेस शटल की 62वी पूर्व निर्धारित लेंड़िंग।

महान अंतरिक्षयात्री कल्पना चावना ने कहा था, “मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूं। प्रत्येक पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए ही मरूंगी।” और सचमुच उनके उपलब्धियों भरे जीवन का अंत कुछ इसी तरह से हुआ।

 

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