नई दिल्ली: हिंदुस्तान में दो तरह की हुकूमतें चलती हैं। एक हुकूमत दिल्ली की सत्ता पर काबिज होती है और दूसरी राजो-रजवाड़ों की शानो-ओ-शौकत देखने वाले प्रांत में सरपंचों की हवेली से शुरू होकर उसी हवेली में खत्म होती है। हैरानी की बात है कि 21वीं सदी में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को डिजिटल इंडिया के सपने दिखा रहे हैं, वहीं राजस्थान के बाड़मेर में अविवाहित लड़कियों के मोबाइल रखने और जींस पहनने पर पाबंदी लगाने की घटना राजा राममोहन राय के दौर के उस भारत के दर्शन करा रही है, जो अब इंडिया हो चला है।
राजस्थान के बाड़मेर जिले की खाफ पंचायत ने एक फरमान जारी कर कहा है कि गांव की लड़कियां न तो मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करेंगी और न ही सोशल साइट्स का। साथ ही पंचायत का यह भी आदेश है कि लड़कियां जींस न पहनें और साथ ही शादी के दौरान दूल्हे को धोती पहननी पड़ेगी। राजस्थान के ग्रामीण हिस्सों में मॉडर्न इंडिया के दौरा में भी पंचायती रूढ़िवादी सोच हावी है।
इस ताजा फरमान के मुताबिक अब विवाह समारोह में दूल्हे को परंपरा के अनुसार ही कपड़े पहनने होंगे। शादी में डीजे बजाए जाने की मनाही है। कुंवारी लड़कियों के मोबाइल इस्तेमाल करने और जींस पहनने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसा नहीं है कि इस पंचायत में केवल गलत फैसले ही लिए है। कुछ मामलों में इस पंचायत द्वारा सही निर्णय भी लिए गए है, पंचायत बाल विवाह के खिलाफ है, पंचायत का मानना है कि बच्चों को स्कूल भेजना आवश्यक है और साथ ही साथ शराब पर प्रतिबंध लगाया गया है। लेकिन लड़कियों के मोबाइल इस्तेमाल ना करने और जींस ना पहनने जैसै निर्णयों को लेकर यह खाप पंचायत विवादों में है।
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