नई दिल्ली: पूजा-उपासना तो जैसे भारतवासियों की सांसों में बसा हुआ है। शायद की ऐसा कोई दिन गुजरता होगा, जब कोई खास पूजा का संयोग न बनता हो। सप्ताह के हर दिन के अनुसार भी विशेष पूजा का विधान है। शुक्रवार को लक्ष्मी देवी का व्रत रखा जाता है। इसे 'वैभव लक्ष्मी व्रत' भी कहा जाता है। माता लक्ष्मी आपके अभावों का अंत करती है। जीवन में कर्म, विचार और व्यवहार ही सबसे बड़ी चीज होती है। यदि आप किसी से बुरा व्यवहार करते है तो आपको यह नारकीय जीवन की ओर ले जाता हैं और अच्छा व्यवहार आपके अभावों का नाश कर वैभवशाली बनाते हैं। जानिए वैभव लक्ष्मी की उपासना की आसान विधि और मंत्र विशेष और कथा के बारें में।
कैसे करें व्रत
शुक्रवार को पूरे दिन व्रत रखकर शाम को स्नान के बाद माता लक्ष्मी की पूजा करें। इस व्रत में वैभव लक्ष्मी जी को पूजा में लाल चंदन, गंध, लाल वस्त्र, लाल फूल अर्पित करें। और खीर का भोग लगाएं।
पूजा के बाद समृद्धि व शांति की इच्छा से इस वैभव लक्ष्मी मंत्र का प्रेमभाव से जप करें -
श्लोक
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥
इस मंत्र जप के बाद वैभव लक्ष्मी व्रत कथा पढ़े या सुने। जो निम्न प्रकार से है-
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