नासिक कुंभ: पहला शाही स्नान संपन्न, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
नई दिल्ली: कुंभ मेले के पहले 'शाही स्नान' में शनिवार को श्रद्धालु कम संख्या में पहुंचे। नासिक में घाट और गोदावरी नदी पर त्र्यंबकेश्वर के 20 घाटों पर सुबह में 'शाही स्नान' शुरू हुआ, जहां
जानिए नासिक कुंभ मेला के बारे में जरूरी बातें-
1. कुंभ मेले के दौरान नासिक और त्र्यंबकेर नगरों में 29 को होने वाले पहले शाही स्नान का समय नजदीक आ रहा है यहां का जिला प्रशासन आगंतुकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयारियां करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है. जिला कलेक्टर दीपेंद्र सिंह कुाह ने बताया कि वैष्णव सम्प्रदाय के दिगम्बर, निरमोही और निर्वाणी अखाड़ों के हजारों महंत और साधु नासिक में पहला पवित्र स्नान करेंगे जबकि शैव सम्प्रदाय के 10 अखाड़ों के महंत और साधु यहां से 30 किलोमीटर दूर त्र्यंबकेर में पवित्र स्नान करेंगे. नासिक पुलिस आयुक्त एस जगन्नाथ ने एक अधिसूचना जारी करते हुए नासिक में शाही जूलुस के मार्ग, महंतों और साधु की ओर से शाही स्नान के समय और विभिन्न अखाड़ों के जुलूस के क्रम सूचीबद्ध किये.
2. अधिसूचना के अनुसार शाही जुलूस तपोवन के लक्ष्मीनारायण मंदिर से सुबह छह बजे शुरू होगा. निर्वाणी अखाड़ा अपना जुलूस सुबह छह बजे शुरू करेगा और इस अखाड़े के महंत और साधु सात बजे तक स्नान के लिए रामकुंड पहुंचेंगे जबकि दिगम्बर अखाड़ा अपना जुलूस सुबह साढ़े छह बजे शुरू करेगा और साढ़े सात बजे रामकुंड पहुंचेगा.
3. निर्मोही अखाड़ा अपना जुलूस सुबह सात बजे निकालेगा और शाही स्नान के लिए आठ बजे रामकुंड पहुंचेगा. अधिसूचना में कहा गया है कि शाही स्नान के बाद महंत और साधु अलग मार्ग से साधुग्राम स्थित अपने शिविर पहुंचेंगे.
4. भारी पुलिस बल की तैनाती की व्यवस्था की गई है जिसमें शीर्ष अधिकारी, आरएएफ, राज्य आरक्षित पुलिस बल और बम निरोधक दस्ता शामिल हैं. गोदावरी नदी को जाने वाले सभी रास्तों को साढ़े तीन किलोमीटर के दायरे में बंद कर दिया जाएगा और उसमें किसी भी वाहन को प्रवेश की इजाजत नहीं दी जाएगी. स्थानीय नागरिकों की सुविधा के लिए कुछ पार बिंदुओं की पहचान की गई है.
5. आस्था के पावन पर्व नासिक कुंभ मेला भारत में चार जगहों पर हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक- में लगता है। इस बार यह नासिक में लगा है. इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति बारहवें वर्ष इस पर्व का आयोजन होता है. हरिद्वार और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है.
6. खगोल गणनाओं के अनुसार यह मेला तब प्रारम्भ होता है, जब सूर्य और चन्द्रमा, वृश्चिक राशी में और वृहस्पति, मेष राशी में प्रवेश करते हैं. इस योग को 'कुम्भ स्नान-योग' कहते हैं और इस दिन को विशेष मंगलिक माना जाता है, क्योंकि यह माना जाता है कि इस दिन पृथ्वी से उच्च लोकों के द्वार इस दिन खुलते हैं और इस प्रकार इस दिन स्नान करने से आत्मा को उच्च लोकों की प्राप्ति सहजता से हो जाती है।
