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आज शास्त्री जी का 111वां जन्मदिन, मौत पर संदेह अब भी बरकरार

नई दिल्ली: भारत के लिए 2 अक्टूबर का दिन और भी खास बन जाता है जब महात्मा गांधी के साथ देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का भी जन्मदिन मनाया जाता है। आज 2

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आज शास्त्रीजी का जन्मदिन, मौत पर संदेह अब भी बरकरार

नई दिल्ली: भारत के लिए 2 अक्टूबर का दिन और भी खास बन जाता है जब महात्मा गांधी के साथ देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का भी जन्मदिन मनाया जाता है। आज 2 अक्टूबर को लाल बहादुर शास्त्री के 111वें जन्मदिन और संदिग्ध हालात में हुई मौत के 50 साल बाद भी उनकी मृत्यु पर सवाल खड़े होते हैं। हालही में नेती जी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़ी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद शास्त्री जी की मौत से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग के मुद्दे ने एक बार फिर तूल पकड़ा है।

लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र अनिल शास्त्री ने दावा किया है कि ताशकंद में पाकिस्तान के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद उनके पिता की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने मांग की है कि घटना की गहन जांच कराई जाए और घटना से संबंधित सभी फाइलें सार्वजनिक की जाएं। 50 साल बाद आज भी लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में मौत ऐसा ही एक रहस्य है।  

11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री की तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान से ताशकन्द समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद उसी रात रहस्यमय परिस्थितियों में शास्त्री जी की मृत्यु हो गई। इस मामले में वहां उनकी सेवा में लगाए गए एक बावर्ची को हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया।

शास्त्रीजी का अंतिम संस्कार के साथ शान्तिवन (नेहरू जी की समाधि) के आगे यमुना किनारे की गयी और उस स्थल को विजय घाट नाम दिया गया. जब तक कांग्रेस संसदीय दल ने इन्दिरा गान्धी को शास्त्री का विधिवत उत्तराधिकारी नहीं चुन लिया, गुलजारी लाल नन्दा कार्यवाहक प्रधानमन्त्री रहे।

शास्त्री जी के दोनों बेटे कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री ने कहा कि ‘मेरी मां (ललिता) को शुरू से ही संदेह था कि उनका (शास्त्री जी का) निधन स्वाभाविक नहीं है। इस मामले में जांच में काफी विलंब हो चुका है, लेकिन अभी भी काफी कुछ किया जा सकता है। सच तो बाहर आना ही चाहिए।’

अगली स्लाईड में हार्ट अटैक या ज़हर से हुई शास्त्री जी की मौत?

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