नैनीताल: प्यार भावनाओं का बंधन है और यह औरत या मर्द का फर्क नहीं देखता। इसीलिए देवी और परिषा छह साल के प्रेम के बाद गुरुवार को जीवनभर के लिए एक-दूजे की साथी बन गई। जिस प्यार का सफर नैनीताल के नयना देवी मंदिर से शुरू हुआ था, उसने रिश्ते का रूप भी नयना के चरणों में ही लिया। इस समलैंगिक विवाह से लोग हतप्रभ्र थे तो परिषा और देवी बेहद खुश। दोनों ने अपना भविष्य भी नैनीताल में ही तलाशने का मन बनाया है।
देवी चटर्जी कोलकाता की हैं और परिषा खुद को हल्द्वानी का बताती हैं। दोनों के बीच फासला जितना दूर का है, दिल उतना ही करीब। फरवरी 2009 की बात है। देवी नैनीताल घूमने आई थी और परिषा मां नयना के दर्शन करने। दिन का समय था कि मंदिर के पास दोनों टकराए और यहीं से पड़ी रिश्ते की पहली बुनियाद।
परिषा को बचपन से ही लड़के पसंद नहीं थे और देवी का स्वभाव भी कुछ ऐसा ही था। दोनों का एक-दूजे से मिलना एक लंबे रिश्ते को जन्म दे गया। परिषा और देवी की नयना के प्रांगण से ही दोस्ती हुई। फिर दोनों का रिश्ता एक साल बाद प्रेम में बदल गया। देवी दिल्ली में डांस की शिक्षिका है और परिषा भी देवी के सहारे ही दिल्ली में डांस शिक्षिका बनी।
नयना देवी मंदिर में दोनों के एक-दूजे के गले में जीवनसाथी बनने की माला डालने के पीछे मकसद यही रहा कि दोनों के रिश्ते ही शुरुआत का यह प्रमुख केंद्र था। शादी से पहले ही दोनों ने ये तय कर लिया है कि जीवन की डोर बंधने के बाद वे अनाथ आश्रम से एक बच्चे को गोद लेंगी और यही बच्चा उनके परिवार का हिस्सा बनेगा। परिषा की उम्र 22 और देवी की 24 साल है। दोनों दिल्ली के मालवीय नगर में साथ-साथ रहती हैं।
-देवी
मुझे बचपन से ही लड़कों में कोई दिलचस्पी नहीं रही। देवी से पहली ही मुलाकात में ऐसा लगा कि वो मेरी भावनाओं को समझ सकती है, बस इसीलिए मैंने उससे रिश्ता जोड़ा। मेरे घरवाले इस रिश्ते को लेकर क्या सोचते हैं, इसकी मुझे परवाह नहीं। बस आज देवी को पाकर खुश हूं।
-परिषा
परिषा को पाकर मैं बहुत खुश हूं। जहां हमारी मुलाकात हुई, वहीं रिश्ता जुड़ा है। हम जीवनभर साथ रहेंगे, खुश रहेंगे और रिश्ता पूरी शिद्दत के साथ निभाएंगे।
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