नई दिल्ली: सीबीआई को यहां विशेष अदालत से शीना बोरा हत्याकांड में पूर्व मीडिया दिग्गज पीटर मुखर्जी का लाई डिटेक्शन टेस्ट करने की इजाजत मिली। इससे पहलो एजेंसी ने कहा था कि आरोपी (पीटर) के बयानों के सत्यापन के लिए उनका लाई डिटेक्शन परीक्षण भी जरूरी है।
पीटर के वकीलों मिहिर घीवाला और कुशाल मोर ने अदालत को बताया कि पूर्व मीडिया कारोबारी मामले में खुद पीडि़त हैं और आरोपी नहीं हैं। वकीलों ने कहा, पीटर अपनी पत्नी इंद्राणी के छलपूर्ण तरीकों का शिकार हैं। उन्होंने कहा कि जब उनकी पत्नी ने कहा कि शीना जीवित है तो उन्होंने विश्वास कर लिया।
इससे पहले शीना बोरा हत्याकांड में वित्तीय पहलू पर ध्यान केंद्रित करते हुए सीबीआई ने कल एक अदालत में कहा था कि पूर्व मीडिया उद्यमी पीटर मुखर्जी और उनकी पत्नी इंद्राणी ने कथित तौर पर नौ कंपनियों की कड़ी के माध्यम से अपनी कंपनी 9एक्स मीडिया से 900 करोड़ रुपए का धन निकाला था।
सीबीआई ने उस समय यह दलील दी जिस समय उसने अदालत को बताया कि उसने मुखर्जी के विदेशी बैंक खातों तक पहुंच के लिए इंटरपोल से मदद मांगी है। साथ ही अदालत ने पीटर की हिरासत 30 नवंबर तक बढ़ा दी।
पीटर की हिरासत की मांग करते हुए सीबीआई ने कहा कि मुखर्जी दंपति ने करोड़ों रुपए का निवेश किया और इंद्राणी और पीटर ने साल 2006-07 के दौरान विभिन्न कंपनियों का गठन किया और उनमें 900 करोड़ रुपए का निवेश किया।
सीबीआई ने दावा किया था कि शीना की हत्या के पीछे वित्तीय लेन-देन का मकसद था। सीबीआई का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल अनिल सिंह ने किया। उन्होंने अदालत से कहा, आईएनएक्स (जिसमें पीटर और इंद्राणी साझेदार थे) सौदों से घपला कर निकाला गया धन सिंगापुर में शीना बोरा के एचएसबीसी खाते में भेजा गया।
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