नई दिल्ली: लोकसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान कोई काम नहीं हो सका। सदन के बैठने के साथ ही कांग्रेस सदस्यों ने सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने विरोध जता रहे सदस्यों से अपनी सीट पर बैठने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सदस्यों को शून्यकाल में मामला उठाने दिया जाएगा। लेकिन कांग्रेस सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने नारेबाजी करते रहे।
नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की अदालत में पेशी से संबंधित अदालत के सात दिसंबर के आदेश के बाद से लगातार सदन में यही दृश्य देखा जा रहा है, जिसमें अदालत ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व (सोनिया गांधी-राहुल गांधी) की पेशी से छूट की मांग नहीं मानी थी।
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार उसके शीर्ष नेताओं के खिलाफ बदले की राजनीति कर रही है। रोजाना हंगामे के लिए कांग्रेस के पास कई कारण रहे हैं। इनमें से एक केरल में आयोजित समारोह में राज्य के मुख्यमंत्री ओमन चांडी को नहीं बुलाना भी है, जिसमें प्रधानमंत्री शामिल हुए थे। दिल्ली सचिवालय पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का छापा भी हंगामे की वजह बना। अरुणाचल की राजनीतिक घटनाओं को कांग्रेस ने राज्य के राज्यपाल द्वारा लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए इस पर विरोध जताया।
लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को सत्ताधारी पक्ष के सदस्यों ने बोलने नहीं दिया। इस पर कांग्रेस के सदस्य प्रश्नकाल के आखिरी हिस्से में सदन से बहिर्गमन कर गए। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सांसदों का तर्क था कि कांग्रेस के सदस्यों को कैसे शांतिपूर्वक बात रखने दी जा सकती है, जबकि उन्होंने प्रश्नकाल में कोई काम नहीं होने दिया।
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