नई दिल्ली: दिल्ली में 15 दिनों के लिए पाबंदी के बाद सेना ने भी मैगी पर बैन लगा दिया गया है। भारतीय सेना ने अपने जवानों को एक परामर्श जारी कर उन्हें मैगी नूडल्स नहीं खाने को कहा और अपनी सभी कैंटीनों से अगले आदेश तक मैगी नूडल्स के मौजूदा स्टॉक को अलग रखने का निर्देश दिया। सेना ने अपनी 1500 कैंटीनों में मैगी की बिक्री रोक दी है।
वहीं देशभर में मैगी की बिक्री को लेकर आज फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया [FSSAI] की सेंट्रल एडवायजरी कमेटी ने सभी राज्यों के खाद्य एवं औषधि नियंत्रक आयुक्त की बैठक बुलाई है। बैठक में राज्यों से आई रिपोर्ट के आधार पर मैगी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया जाएगा।
मैगी मामले में अब केंद्र सरकार ने सभी राज्यों में इसके इस्तेमाल को लेकर एडवाइजरी जारी की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने यह एडवाइजरी जारी की है। गौरबलत है कि मैगी के उपयोग को लेकर कई राज्यों ने इस पर पाबंदी लगा दी है।
स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बुधवार को कहा, 'हमने नेस्ले कंपनी को 2 हफ्ते का समय अपना पुराना स्टॉक बदलने के लिए दिया है। नया स्टॉक आने पर एक बार फिर से नमूनों की जांच होगी। इसके साथ ही सरकार बाजार में मौजूद दूसरी कंपनियों के नूडल की भी जांच करेगी।
मैगी विवाद पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का बयान, कहा मामला गंभीर और NCRDC को सौंपा गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
मैगी विवाद पर अमिताभ बच्चन ने सफाई देते हुए कहा है कि, वो कानून का साथ देंगे। साथ ही मैगी खाने से जिन लोगों का नुकसान हुआ है उसकी भरपाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि, पिछले दो साल से उन्होंने मैदी का प्रचार बंद कर दिया है।
इतना ही नहीं कई और राज्यों ने इसके नमूनों की जांच के आदेश दिए हैं, तो साथ ही अन्य फास्ट फूड उत्पाद भी जांच के दायरे में आ गए हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने लोकप्रिय स्नैक्स 'कुरकुरे' और 'लेज' के नमूनों को भी जांच के लिए भेज दिया है।
कल केंद्र सरकार के केंद्रीय भंडार और बिग-बाजार समेत फ्यूचर गु्रप के स्टोर ने भी अपने यहां मैगी का स्टॉक हटा दिया था। फ्यूचर गु्रप ने फैसला किया है कि जब तक मैगी पर कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता वह अपने स्टोर में मैगी नहीं रखेगा।
दिल्ली में मैगी के 10 नमूनों में लेड तय सीमा से ज्यादा मिला। मसालों के पांच नमूनों में मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाया गया है, जबकि लेबल पर इसकी जानकारी नहीं दी गई है। यूपी में तो लेड की मात्रा 2.25 की जगह 17.2 पीपीएम पाई गई।
यह मामला भारतीय दंड विधान की धारा 270 (हानिकारक कृत्य जिससे जीवन के लिए खतरनाक रोगों के संक्रमण फैलने का खतरा) 270 (हानिकारक भोजन या पेय की बिक्री), 276 (दवा की किसी अन्य दवा या नुस्खे के रूप में बिक्री) एवं 420 (धोखाधड़ी) के तहत दाखिल किया गया है।
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