नई दिल्ली: मैगी नूडल्स बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया को अब राहत मिल गई है। केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान ने मैगी के सैंपल को खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा पाया है। यह संस्थान भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा स्वीकृत है। जून में जब मैगी पर प्रतिबंध लगाया गया था तो गोवा के खाद्य व दवा प्रशासन (एफडीए) ने पांच नमूने सीएफटीआरआई को भेजे थे। गोवा एफडीए के निदेशक सलीम ए वेलजी ने कहा कि सीएफटीआरआई के निष्कर्षों के अनुसार ये नमूने खादय सुरक्षा एवं मानक नियम, 2011 के अनुसार खादय सुरक्षा मानकों का अनुपालन करते हैं।
आपको बता दें कि मई के आखिर में यूपी में मैगी के सैंपल में तय मात्रा से अधिक लैड पाए जाने के बाद पाबंदी लगा दी गई थी। इसके बाद देखते ही देखते एक के बाद एक कई राज्यों ने मैगी पर रोक लगा दीया था। आखिरकार 5 जून को देश भर में मैगी पर पाबंदी लगा दी गई थी
मैगी मे खराबी पाए जाने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ था। यहां तक की इसके ब्रांड एम्सेबेडर अमिताभ बच्चन और माधुरी दीक्षित पर कोर्स केस भी कर दिया गया था। जिसके चलते मैगी बनाने वाली नेस्ले को इस रोक के चलते दूसरी तिमाही में 64 करोड़ से ज्यादा का नुकसान भी हुआ।
अब सेंट्रल फूड टेक्नोलोजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट की क्लिन चिट के बाद नेस्ले को दोबारा बाजार में उतरने और छाने को लेकर नेस्ले के नए मुखिया सुरेश नारायण खुश नजर आ रहे हैं। नेस्ले इंडिया के नए मुखिया सुरेश नारायणन ने साफ कह दिया था कि बहुत जल्द मैगी लोगों के घर में लौटेगी।
गौरतलब है कि नेस्ले इंडिया ने बांबे हाई कोर्ट में कहा था कि वह अपने प्रोडक्ट के स्वतंत्र लैब में टेस्ट कराने के लिए तैयार है, बशर्ते कि ये टेस्ट प्रतिष्ठित वैज्ञानिक की मौजूदगी में किए जाएं। नेस्ले ने बांबे हाई कोर्ट में इस संबंध में एक याचिका दायर की थी।
फूड अथॉरिटी ने मैगी के मामले में ये तीन उल्लंघन पाए थे-
1. मैगी में लेड तय सीमा से ज्यादा है.
2. कंपनी ‘नो एडेड एमएसजी’ का लेबल लगाकर गुमराह कर रही है।
3. मैगी ओट्स मसाला नूडल्स विद टेस्टमेकर को बिना प्रोडक्ट अप्रूवल के बेचा जा रहा है।
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