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जन्माष्टमी पर छाया तीन पत्ती का जादू

नई दिल्ली: जन्माष्टमी पर मक्खन से भरी हांडी तोड़ता मानव पिरामिड भले ही लोकप्रिय हो पर कुछ लोगों के लिए भगवान कृष्ण जन्म के मौके पर तीन पत्ती खेलने का आकर्षण कहीं ज्यादा है। जन्माष्टमी

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जन्माष्टमी पर छाया तीन पत्ती का जादू

नई दिल्ली: जन्माष्टमी पर मक्खन से भरी हांडी तोड़ता मानव पिरामिड भले ही लोकप्रिय हो पर कुछ लोगों के लिए भगवान कृष्ण जन्म के मौके पर तीन पत्ती खेलने का आकर्षण कहीं ज्यादा है। जन्माष्टमी के करीब एक माह पूर्व ही लोग तीन पत्ती खेलना शुरू कर देते हैं। इस मौके पर विशेष रूप से फॉर्महाउस और क्लब भी बुक कराए जाते हैं।

खेल प्रेमी मीना सचदेवा ने बताया कि यह त्योहार समाजिक बुराईयों को खत्म करने का सूचक माना जाता है। इसलिए जन्माष्टमी पर तीन पत्ती खेलने का संबंध परंपरा से भी है। सचदेवा ने कहा, इस कई साल पुरानी प्रथा को दोहराते हुए गुजराती लोग बड़े पैमाने पर जन्माष्टमी से पहले तीन पत्ती खेलते हैं। ऐसा वह त्योहार के दिन तक करते हैं। नौकरी में मसरूफ लोगों के लिए इस दौरान फॉर्महाउस और क्लब में जाकर तीन पत्ती खेलना संभव नहीं हो पाता इसलिए वह ऑनलाइन इस खेल का मजा लेते हैं। इस खेल का ऑनलाइन लुत्फ उठाने वाले शांतनु माथुर ने कहा, जब मैं अमेरिका में था तब जन्माष्टमी के मौके पर अपने गुजराती दोस्तों के साथ तीन पत्ती खेलना काफी मजेदार होता था।

माथुर ने कहा, मैं भारत आ गया और मेरे दोस्त अलग अलग स्थानों पर जा बसेे हैं। इसलिए अब पुराने दोस्तों से संपंर्क करने के लिए ऑनलाइन यह खेल खेलना सबसे सही रहता है। अग्रवाल जो ऑनलाइन ही इस खेल का मजा लेते है उन्होंने कहा कि यह खेल ऑनलाइन खेलना ज्यादा सुरक्षित है क्योंकि कई जगह पर यह गैर कानूनी है। जन्माष्टमी के अलावा कई लोग अन्य त्योहारों पर भी तीन पत्ती का लुत्फ उठाते हैं।

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