कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को 'गौ रक्षा सतर्कता समूहों' के बढ़ने पर चिंता व्यक्त करते हुए जोर देकर लोगों के 'चुनाव के अधिकार' पर जोर दिया। तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने साथ ही 'हर चीज के भगवाकरण' के प्रयास के खिलाफ भी चेतावनी दी। तृणमूल अध्यक्ष ने शहर में पार्टी की एक रैली को संबोधित करते हुए गुजरात के उना शहर में चार दलित युवकों पर हुए अत्याचार की भी कड़ी निंदा की। मुख्यमंत्री ने साथ ही कहा कि बंगाल में ऐसे किसी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ममता ने कहा, "हम गुजरात में दलितों पर हुए अत्याचार की कड़ी निंदा करते हैं। गौ रक्षा के नाम पर वे सांप्रदायिक संघर्ष और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।" ममता ने बंगाल के एक दक्षिणपंथी गुट गौ रक्षा समिति का जिक्र करते हुए कहा, "मुझे पता चला है कि एक पार्टी के साथ सांठगांठ रखने वाले कुछ तत्व यहां बंगाल में लोगों से पूछ रहे हैं कि उनके पास कितनी गाएं हैं।"
ममता ने कहा, "गुजरात में जो कुछ भी हो रहा है, हम उसकी निंदा करते हैं और अगर ऐसी किसी चीज के लिए बंगाल में प्रयास किया गया, तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम राजनीतिक रूप से लड़ेंगे। लोगों को यह चुनने का अधिकार है कि वे क्या खा सकते हैं, पहन सकते हैं या पढ़ सकते हैं। कुछ लोग यह तय नहीं कर सकते कि बाकी लोग क्या खाएं, पहनें या पढ़ें।" उन्होंने कहा, "हर चीज के भगवाकरण का प्रयास हो रहा है।"
तृणमूल अध्यक्ष ने कानून और व्यवस्था के मुद्दे पर तृणमूल सरकार की आलोचना करने वाले केंद्रीय नेताओं का जिक्र करते हुए कहा, "जब पठानकोट की घटना होती है, तब हम अपनी राय नहीं देते और देश की एकता की बात करते हैं। जब बांग्लादेश में आतंकवादी हमला होता है, तब भी हम अपनी राय नहीं देते। जब कश्मीर में समस्या होती है, हम शांति के लिए प्रार्थना करते हैं, लेकिन राय नहीं देते। फिर आप हमारे मामले में हस्तक्षेप क्यों कर रहे हैं।" ममता ने कहा, "सरकार में होने का मतलब जिम्मेदाराना व्यवहार करना है। आप सरकार में रहते हैं और साथ ही हमें डराने की कोशिश करते हैं..यह अस्वीकार्य है।"
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