नई दिल्ली : हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन (पीएमएलए) का केस दर्ज किया है। गुड़गांव के मानेसर में जमीन के अधिग्रहण में वित्तिय अनियमितताओं को लेकर यह केस दर्ज किया गया। इस मामले में किसानों को 15 सौ करोड़ का चूना लगाया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय का मामला धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत बनाया गया है। एजेंसी ने भ्रष्टाचार के फलस्वरूप कथित रूप से अवैध तौर हुई आपराधिक कमाई की पहचान करनी शुरू कर दी है। जल्द ही आरोपियों को सम्मन भेजा जाएगा। जांच के तहत एजेंसी दागी कोष से अर्जित परिसपंत्ति की भी जांच कर रही है ताकि पीएमएलए के तहत उनकी कुर्की की जा सके।
पिछले साल सीबीआई ने दर्ज किया था केस
यह मामला पिछले साल सितंबर में इस संबंध में सीबीआई द्वारा दर्ज किये गए एक मामले से संबंधित है। सीबीआई ने इस आरोप पर मामला दर्ज किया था कि 27 अगस्त, 2004 से 27 अगस्त 2007 के बीच निजी बिल्डरों ने हरियाणा सरकार के अज्ञात जनसेवकों के साथ मिलीभगत कर गुड़गांव जिले में मानसेर, नौरंगपुर और लखनौला गांवों के किसानों और भूस्वामियों को सरकार द्वारा अधिग्रहण का भय दिखाकर उनकी करीब 400 एकड़ जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली थी।
भूस्वामियों को 1500 करोड़ का नुकसान
आरोप है कि मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला के भूस्वामियों को करीब 1500 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ। पिछले हफ्ते हुड्डा के निवास की तलाशी के दौरान सीबीआई ने करोड़ों रूपए के धन के लेन-देन का ब्यौरा मिलने का दावा किया था। पूरे ब्यौरे को जांच एजेंसी खंगाल रही है।
मामूली कीमत पर किसानों की जमीन हथियाई गई
सीबीआई ने आरोप लगाया कि शुरू में हरियाणा सरकार ने मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला गांवों में औद्योगिक आदर्श टाउनशिप की स्थापना के लिए 912 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए जमीन अधिग्रहण अधिनियम के तहत अधिसूचना जारी की थी। बाद में सरकारी अधिग्रहण का भय दिखाकर निजी बिल्डरों ने मामूली कीमत पर भूस्वामियों की जमीन हथिया ली।
सरकारी नीति का उल्लंघन
उसके बाद, सरकारी नीति का उल्लंघन करते हुए अधिग्रहण प्रक्रिया से मुक्त कर यह जमीन उसके मूल भूस्वामियों के बजाय बिल्डरों, उनकी कंपनियां और एजेंटों के पक्ष में जारी करते हुए सक्षम प्राधिकार यानी उद्योग निदेशक द्वारा आदेश जारी किया था।
महज 100 करोड़ में 400 एकड़ जमीन खरीदी
सीबीआई ने प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि इस तरह 400 एकड़ की जिस जमीन की कुल कीमत बाजार दर चार करोड़ रूपए प्रति एकड़ के हिसाब से 1600 करोड़ रूपए थे, वह जमीन निजी बिल्डरों ने कथित रूप से भूस्वामियों से महज करीब 100 करोड़ रूपए में खरीदी।
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