श्रीनगर: पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने नेताओं और मीडिया से जेएनयू कैंपस में कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी नारेबाजी करने के आरोपी छात्रों पर फैसला नहीं सुनाने की अपील करते हुए कहा कि इसे अदालत के लिए छोड़ देना चाहिए। महबूबा ने कहा, मुझे उम्मीद है कि जेएनयू मुद्दे पर संविधान का पालन होगा। यह अदालत पर छोड़ देना चाहिए कि कौन दोषी है और कौन नहीं। राजनीतिक दलों को किसी को बेकसूर या दोषी ठहराना बंद करना चाहिए।
जेएनयू परिसर में नौ फरवरी को कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी नारेबाजी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, इसे (फैसला के लिए) अदालत पर छोड़ देना चाहिए। नेताओं और मीडिया को उनपर फैसला नहीं सुनाना चाहिए। पीडीपी अध्यक्ष ने यह भी कहा कि मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। महबूबा ने कहा, जोड़-तोड़ कर बनाए गए वीडियो का प्रसारण क्यों हुआ? फिर नेताओं ने शोर मचाना शुरू कर दिया। मुद्दा तब बिगड़ते गया जब लोगों ने खुद को राष्ट्रवादी और दूसरे को राष्ट्रविरोधी बताना शुरू कर दिया।
उन्होंने कहा कि देश का लोकतंत्र यह देखने के लिए इतना मजबूत है कि धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कौन बेवकूफ बना रहा है या छद्म राष्ट्रवाद के नाम पर कौन शोषण कर रहा है और लोग इसे सफल नहीं होने देंगे।
पीडीपी प्रमुख ने कहा कि प्रताड़ना की आशंका के कारण उन्होंने दो नेताओं- हसीब द्राबू और अमिताभ मट्टू को जेएनयू का दौरा करने और यह देखने के लिए कहा कि क्या वहां जम्मू कश्मीर के छात्रों के खिलाफ ऐसी घटना हुई। उन्होंने कहा, मैंने हसीब द्राबू और अमिताभ मट्टू से जेएनयू जाने को कहा। वे कल गए और कुलपति से मिले और रविवार को एक और बैठक हुई। प्रताड़ना की काफी आशंका है। खैर, अब तक कोई शिकायत नहीं है कि किसी भी कश्मीरी छात्र को निशाना बनाया गया।
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