श्रीनगर: जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को संवेदनशील मुद्दों को 'उछालने' के लिए विपक्ष और मीडिया पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों के लिए घाटी में अलग बस्ती बसाने जैसे संवेदनशील मुद्दे को उछाल कर 'कश्मीर की गलत छवि' पेश की जा रही है। महबूबा ने राज्य विधानसभा में कहा, "मैं नहीं जानती हूं कि ये समाचार पत्र क्या चाहते हैं? क्या वे राज्य में आग लगाना चाहते हैं? खबर प्रकाशित करने से पहले उन्हें जांच करनी चाहिए।"
निर्दलीय विधायक इंजीनियर राशिद ने अध्यक्ष के आसन के पास आकर एक समाचार पत्र की प्रति लहराई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री का गुस्सा फूटा। अखबार में प्रथम पृष्ठ पर उपद्रवग्रस्त इस राज्य में सेवा देने के बाद रिटायर हुए सैनिकों के लिए श्रीनगर की सीमा पर एक अलग टाउनशिप बनाने की खबर तस्वीर सहित छपी थी। महबूबा ने कहा कि लोकप्रियता हासिल करने के लिए समाचार पत्र ने 'गलत खबर' छापी है और पूर्व सैनिकों के लिए एक निर्माणाधीन कॉलोनी को दर्शाया है।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि समाचार पत्र में छपी तस्वीर जम्मू एवं कश्मीर लाइट इंफैंट्री रेजीमेंट में सेवा देने वाले विवाहित सैनिकों की पत्नियों और बच्चों के लिए बन रहे आवासों की है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, उनसे सख्ती से निपटा जाएगा। प्रश्नकाल के दौरान महबूबा ने विपक्षी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस को जमकर कोसा और कहा कि ये पार्टियां गैर जरूरी मुद्दे उठा रही हैं।
मुख्यमंत्री के निशाने पर मुख्य रूप से नेशनल कांफ्रेस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुला रहे। महबूबा ने कहा कि उमर अब्दुल्ला ने सैनिक बोर्ड की चार बैठकों में भाग लिया था और उन बैठकों में उन्होंने सैनिकों के लिए पृथक कॉलोनी के लिए जमीन चिन्हित करने के निर्देश दिए थे। अब वही इस मुद्दे पर ट्वीट पर ट्वीट कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री उमर ने सैनिक कालोनी के लिए जमीन चिन्हित करने के महबूबा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने ऐसा कोई भी आदेश दिया था तो उसे सामने लाकर पेश किया जाए। उन्होंने कहा कि दरअसल यह मुख्यमंत्री हैं, जो राज्य को आग में झोंक रहीं हैं।
मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर कांग्रेस के सदस्यों ने भी आपत्ति जाहिर की। शनिवार को आतंकियों द्वारा दो पुलिसकर्मियों की हत्या का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के नेता नवांग रिगजिन जोरा ने पूछा, "क्या अनंतनाग में हमले मीडिया के कारण हुए।"
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