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मर्सिडीज हिट एंड रन केस में एतिहासिक फैसला, नाबालिग पर चलेगा एडल्ट की तरह केस

नई दिल्ली: 2 अप्रैल को दिल्ली में हुए हिट एंड रन केस में कल एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला आया है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी पर एक एडल्ट की तरह केस चलाने का

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नई दिल्ली: 2 अप्रैल को दिल्ली में हुए हिट एंड रन केस में कल एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला आया है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी पर एक एडल्ट की तरह केस चलाने का फैसला दिया है। दो महीने बाद आए इस फैसले ने हादसे में मारे गए सिद्धार्थ के परिवार वालों को थोड़ी राहत मिली है।

2 महीने पहले हुए दिल्ली सिविल लाइन मर्सिडीज हिट एंड रन केस में सिद्धार्थ नाम के एक मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव की मौत हो गई थी। इसी हिट एंड रन मामले में 2 महीने बाद एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया। हादसे के जिम्मेदार मर्सिडीज को चलाने वाले नाबालिग पर एक एडल्ट यानी बालिग आरोपी की तरह केस चलेगा। बता दें कि 2 अप्रैल को हुए हादसे के चार दिन बाद नाबालिग आरोपी 18 साल का हो गया था।

जस्टिस बोर्ड ने कहा- अंजाम से वाकिफ था नाबालिग

अपना फैसला सुनाते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने कहा कि घटना के वक्त और उसके बाद नाबालिग आरोपी का बर्ताव बताता है कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों से पूरी तरह वाकिफ था। घटनास्थल से बरामद सबूतों के आधार पर साफ नजर आता है कि नाबालिग आरोपी दूसरों की जिंदगी, उनकी सेफ्टी और सड़क सुरक्षा को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं था। घटना के दिन भी उसमें अपराध के नतीजों को समझ सकने की काबिलियत थी। जस्टिस बोर्ड का यह फैसला दिल्ली पुलिस की उस अर्जी पर आया है, जिसमें हिट एंड रन केस को लोअर कोर्ट भेजने और टीनएजर के खिलाफ एक एडल्ट के तौर पर केस चलाने की मांग की गई थी।

इस केस में अब तक क्या हुआ?

  • आरोपी नाबालिग को IPC की धारा 304 और 201 के तहत आरोपी बनाया गया है
  • इसके अलावा पुलिस ने बोर्ड से ये भी अपील की है कि चूंकि आरोपी मानसिक और शारीरिक तौर पर पूरी तरह से सक्षम है और 16 साल से बड़ा है तो उसे वयस्क की तरह ट्रीट किया जाए
  • पुलिस ने हिट एंड रन केस को लोअर कोर्ट भेजने और टीनएजर के खिलाफ एक एडल्ट के तौर पर केस चलाने की मांग की थी
  • इस मामले में पुलिस ने 300 पन्नों की चार्जशीट जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में दाखिल की और मामले में कुल 50 गवाह थे

सिद्धार्थ की बहन ने क्या कहा?

हिट एंड रन मामले का शिकार हुए सिद्धार्थ शर्मा का परिवार अपने बेटे की मौत के बदले इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के इस फैसले के बाद हादसे में जान गंवाने वाले सिद्धार्थ की बहन ने फैसले पर खुशी ज़ाहिर की। हमारे चैनल इंडिया टीवी से खास बातचीत में सिद्धार्थ की बहन ने बताया कि किस तरह उन्हें इंसाफ के लिए भटकना पड़ रहा है और वो चाहती हैं कि आगे ऐसा किसी के साथ ना हो।

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