नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा कि अलग-अलग मंत्रालयों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के आंतरिक मामलों में जरूरत से ज्यादा दखल देने से बचना चाहिए। इससे एम्स के विकास पर असर पड़ता है। AIIMS के 43वें दीक्षांत समारोह में जेटली ने कहा, "इसके (AIIMS के) बेहतर कामकाज के लिए मंत्रालयों को इसके अंदरूनी मामलों में जरूरत से ज्यादा दखल देने से दूर रहना चाहिए। सरकार को अस्पतालों की मदद करनी चाहिए लेकिन इसके रोजाना के प्रबंधन से अलग रहना चाहिए।"
एम्स के दीक्षांत समारोह में 552 छात्रों को दी गई उपाधि
दीक्षांत समारोह में एम्स के कुल 552 छात्रों को उपाधि दी गई। इनमें मास्टर्स इन मेडिसिन और सर्जरी की उपाधियां भी शामिल हैं। इस मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अदालतों में चिकित्सकों के खिलाफ बढ़ते मुकदमों की संख्या, निजी अस्पतालों में चिकित्सकों के बढ़ते अक्खड़ बर्ताव, सरकारी अस्पतालों में मानवीय पहलू की कमी को लेकर रोगियों में असंतोष जैसे मुद्दों का हल किए जाने की जरूरत है।
एम्स जैसी संस्थाओं का काम प्रोफेशनल लोगों पर छोड़ना चाहिए
जेटली ने कहा कि किसी भी संस्था की प्रगति को इसके पेशेवर लोगों पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा, "AIIMS जैसी संस्थाओं के सामने अपनी चुनौतियां होती हैं। इनमें कई अन्य के साथ दूसरे अस्पतालों को प्रतिभावान चिकित्सक उपलब्ध कराना भी शामिल है। ऐसी हालत में सभी को संस्था का सहयोग करना चाहिए।"
अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के लिए नीतियों की समीक्षा हो
जेटली ने कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों को लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान से भी नवाजा। उन्होंने कहा कि सरकार AIIMS का विस्तार चाहती है लेकिन इसमें भूमि की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आ रही है। उन्होंने निजी और सार्वजनिक, दोनों क्षेत्रों में और अधिक अस्पताल खोलने के लिए नीतियों की समीक्षा का सुझाव भी दिया।
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