नई दिल्ली: गुरुवार सुबह आपातकाल के 40 साल पूरे होने पर मोदी ने ट्वीट के जरिए कांग्रेस पर निशाना साधा, जो कि उस दौरान सत्ता में थी। उन्होंने लिखा, “लोकतांत्रिक आदर्शों और मूल्य को और मजबूत बनाने के लिए हम हर संभव चीज करते हैं।”
आपातकाल के 40 साल पूरा होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि एक जीवंत लोकतंत्र प्रगति की कुंजी है और लोकतांत्रिक आदर्शों और लोकाचार को मजबूत बनाने के लिए सब कुछ किया जाना चाहिए। मोदी ने ट्वीट किया कि भारत के सबसे अंधकारमय समय-आपातकाल के 40 साल पूरा हो रहे हैं जब राजनीतिक नेतृत्व ने लोकतंत्र को कुचल दिया था। उन्होंने कहा, एक जीवंत लोकतंत्र प्रगति की कुंजी है। आगे अपने लोकतांत्रिक आदर्शों और लोकाचार को मजबूत बनाने के लिए जो भी संभव है, हम वो करें।
प्रधानमंत्री ने स्मरण किया कि 1975 में आज के ही दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल का लाखों लोगों ने विरोध किया था। उन्होंने कहा, हमें उन लाखों लोगों पर गर्व है जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया और उनके प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया कि हमारा लोकतांत्रिक तानाबाना सुरक्षित रहे। मोदी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण का उल्लेख करते हुए कहा, जेपी के आह्वान से प्रेरित पूरे भारत में बहुत सारे पुरूषों और महिलाओं ने हमारे लोकतंत्र की सुरक्षा के आंदोलन में नि:स्वार्थ भाव से भाग लिया। प्रधानमंत्री ने कहा, व्यक्तिगत तौर पर, आपातकल कई स्मृतियों को वापस लाता है। नौजवान के रूप में हमने आपातकाल विरोधी आंदोलन के दौरान बहुत कुछ सीखा।
उन्होंने कहा, आपातकाल लोकतंत्र की बहाली के एक लक्ष्य के लिए लड़ रहे नेताओं और संगठनों के व्यापक आयाम के साथ जुड़कर काम करने का बड़ा अवसर था। देश में व्यापक जनांदोलन क बीच दो साल के बाद आपातकाल हटा लिया गया था।
जेटली बोले अब तानाशाही संभव नहीं-
वित्त मंत्री अरूण जेटली ने भी आपातकाल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के समय में यह किसी के लिए भी संभव नहीं है कि वो लोकतांत्रित भारत को तानाशाही की शक्ल दे दे। आपको बता दें कि अरूण जेटली ने भी साल 1975 में लगे आपातकाल के दौरान 19 महीने जेल में बिताए थे।
पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 40 साल पहले मीडिया को कमजोर कर दिया गया था, पुलिस और नौकरशाही चुस्त हो गई थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के लिए भी आपातकाल काले दिन जैसा ही था। जेटली ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात पर संदेह है कि आज के दौर में भी इस तरह के हालात पैदा हो सकते हैं।
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