श्रीनगर: जिस कश्मीर में नौजवानों के हाथों में पत्थर नजर आते हैं, जिस कश्मीर में य़ुवा बहकावे में आकर आंतकवादी बन जाते हैं उसी कश्मीर का एक बेटा ऐसा भी है जिसने हालात से लड़ते हुए इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। लेकिन मकसद सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि सपना देश की सेवा करना था इसलिए बीएसएफ की तैयारी करता रहा और इस बार बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट एग्जाम में ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक हासिल किया।
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टॉपर की आवाज सुनो पत्थरबाज़ों
उधमपुर का नबील अहमद का सरनेम भी वानी है। इस नबील ने घाटी में आतंक का साथ दे रहे युवाओं को नसीहत दी है। खुद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नबील वानी को दिल्ली बुलाकर सम्मानित किया और उनकी पीठ थपथपाई। नबील अहमद वानी ने बीएसएफ की सहायक कमांडेंट परीक्षा को टॉप करते हुए इतिहास रच दिया। जिस कश्मीर घाटी बुरहान वानी की दहशत थी, जिस घाटी में बुरहान वानी जैसा युवा आतंक का आइकन था थे, उसी घाटी से निकले इस वानी के देशप्रेम को सलाम है।
'बंदूक नहीं, पेन से बदलो तकदीर'
उधमपुर में जूनियर इंजीनियर की नौकरी करने वाले नबील अहमद वानी ने बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट एग्जाम में ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक हासिल किया। नबील कहता है कि किस्मत बदलने का सबसे मुकम्मल तरीका कलम उठाना है, न कि बंदूक।
राजनाथ सिंह ने वानी को दिल्ली बुलाकर किया सम्मानित
ये नबील अहदम वानी की सफलता का परचम ही था कि खुद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नबील से मुलाकात की और उसकी कामयाबी को कश्मीरी नौजवानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बताया। एक सरकारी स्कूल के टीचर के बेटे ने सरकारी स्कूल में पढ़ाई पूरी करने के बाद पंजाब से इंजीनियरिंग की। वहां भी टॉप करने की वजह से स्कॉलरशिप मिली।
तमाम परीक्षाओं के बीच जिंदगी ने भी नबील अहमद का कई बार इम्तिहान लिया। परिवार को अब गर्व है कि बेटा बीएसएफ़ में तैनात होकर उस मिट्टी की हिफाजत करेगा, जिसने उसकी मेहनत को सलाम किया है।
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